100 से ज्यादा मेडल जीत चुके मध्यप्रदेश के "मिल्खा सिंह" सरकार से कर रहे हैं इच्छा मृत्यु की गुहार

 

भोपाल/अंजली कुशवाह: राजधानी भोपाल के भारतीय जनता पार्टी के दफ्तर के बाहर आज कुछ अलग ही माहौल था. कार्यालय के बहार खड़ा एक शख्स लोगों का ध्यान बरबस ही आकर्षित कर रहा था. इसकी वजह इस शख्स ने गले में कई मेडल टांग रखे हैं, इसके अलावा इसके पास कुल 100 से ज्यादा ट्रॉफीज थीं. खाकी वर्दी में खड़ा ये शख्स यज्ञ नारायण सेन है जो MP के उत्तर वन मंडल शहडोल रेंज में चौकीदार पद पर पदस्थ सेन लेकिन अब सरकार से इच्छामृत्यु चाहते हैं.

नौकरी में नहीं मिल रहा प्रमोशन,

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यज्ञ नारायण सेन पिछले 35 साल से वन विभाग की सर्विस में है और देश-प्रदेश के लिए दौड़ में करीब 100 से ज्यादा पदक जीत चुके है. उन्होंने रेस प्रतियोगिताओं में भाग लेकर स्टेट से लेकर नेशनल लेवल तक अपने विभाग का नाम रोशन किया है और कई मेडल, ट्राफियां, प्रमाण पत्र हासिल किए हैं. लेकिन इन सबके बावजूद यज्ञ सेन को उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है.

यज्ञ नारायण की नियुक्त 1988 में शहडोल के उत्तर वन मण्डल में हुई थी. तब से वो वहां चौकीदार के पद पर काम कर रहे हैं. उन्होंने अभी तक वन विभाग की झोली में कई मेडल डाले हैं. लेकिन इतने सालों बाद भी उन्हें अब तक न तो कोई प्रमोशन दिया गया और उल्टा उन्हें कार्यभारित बताकर उनका वेतन भी आधा कर दिया गया. यज्ञ नारायण का कहना है उन्होंने विभाग के लिए इतने मैडल जीते हैं आखिर विभाग को उनके बारे में कुछ तो सोचना चाहिए. जिसके चलते वह इच्छा मृत्यु मांगने पर मजबूर है.

इच्छा मृत्यु के लिए मजबूर हैं MP वन विभाग का मिल्खा सिंह

MP वन विभाग के “मिल्खा सिंह” आज दर-दर भटकने पर मजबूर है. यज्ञ नारायण सेन वन विभाग में चौकीदार है लेकिन उनकी पहचान एक बेमिसाल धावक के तौर पर है जिसकी वजह से उन्हें “मिल्खा” नाम मिला था. लेकिन सरकार और विभाग उनकी सभी उपलब्धियों को भूला चुका हैं. जिसकी वजह से मजबूर होकर सरकार से इच्छा मृत्यु की अपील कर रहे हैं.

सरकार को नहीं हैं ध्यान

बता दें कि सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए अलग से कोटा है. ओलंपिक में पदक जीतने पर खिलाड़ियों पर इनाम और नौकरियों की बारिश की गयी है. लेकिन जो सरकारी विभाग में पहले से ही खिलाड़ी हैं. अपने खेल से प्रदेश का नाम कई बार रोशन भी कर चुका हैं उस व्यक्ति की सरकार ने कोई सुध ही नहीं ली हैं.

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