
- जिस राज्य में हैं वहीं मुहैया करवाई जाएगी सभी चीजें
Bhopal Desk ,Gautam :- अपने-अपने घरों से दूर कई मजदूर और विद्यार्थी अनेक जगहों पर फंसे हुए हैं। केंद्रीय गृह विभाग (MHA) ने राज्य आपदा कोष के नियमो में कुछ बदलाव किया है और इसके तहत सभी राज्यों को एक एडवाइजरी भी ज़ारी कर दिया गया है।
इसके तहत जिसके 21 दिन के लॉकडाउन (Lock Down) के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन और ठहरने की अस्थायी व्यवस्था के लिए इस कोष से पैसा दिया जाएगा। मंत्रालय ने अपने सभी मुख्य सचिवों को एक पत्र भेजा है जिसमे यह लिखा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित बंद के दौरान प्रवासी मजदूरों को चिकित्सा सेवा एवं कपड़े भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक एसडीआरएफ के नये नियमों के तहत अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सीय देखभाल आदि का प्रावधान बंद के चलते फंसे प्रवासी मजदूर समेत बेघर लोगों तथा राहत शिविरों या अन्य स्थानों पर रह रहे लोगों पर लागू होगा।
अमित शाह ने भी किया ट्वीट
देश के गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया, 'प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में आज सभी राज्यों को COVID-19 के मद्देनजर SDRF के फंड आवंटन का उपयोग करते हुए सभी बेघर, प्रवासी मज़दूरों और लॉकडाउन के कारण राहत शिविरों में रुके लोगों को अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल आदि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।'
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में आज सभी राज्यों को COVID-19 के मद्देनजर SDRF के फंड आवंटन का उपयोग करते हुए सभी बेघर, प्रवासी मज़दूरों और लॉकडाउन के कारण राहत शिविरों में रुके लोगों को अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल आदि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। — Amit Shah (@AmitShah) March 28, 2020 “>http:// प्रधानमंत्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में आज सभी राज्यों को COVID-19 के मद्देनजर SDRF के फंड आवंटन का उपयोग करते हुए सभी बेघर, प्रवासी मज़दूरों और लॉकडाउन के कारण राहत शिविरों में रुके लोगों को अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल आदि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। — Amit Shah (@AmitShah) March 28, 2020
तैयार करवाया जाएगा राहत कैंप
देश भर से ऐसी तस्वीरें आ रही थी जिसमे मजदूर काफी दूर-दराज़ क्षेत्रों से पैदल ही अपने घर निकल लिए थे। इसके बाद गृह मंत्रालय ने सब ही राज्यों को यह निर्देश दिया है कि सभी राज्यों में इन मजदूरों के लिए राहत कैंप तैयार करवाया जाए। और यह सुनिश्चित भी करें कि उन तक यह जानकारी पहुंचे। राष्ट्रव्यापी बंद की घोषणा के बाद सामान्य यातायात सेवाएं बंद हो जाने के कारण प्रवासी मजदूरों के पास पैदल चलकर घर पहुंचने का ही विकल्प बचा है।