इंदौर के बाद जबलपुर में कांग्रेस लागू कर सकती है ये "फार्मूला" बढ़ी विधायकों की बेचैनी, कटेगा नेताओं का पत्ता

मध्यप्रदेश/जबलपुर – मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां जोरों पर है, पर नगरीय निकाय चुनाव कब तक संपन्न होंगे इसकी कोई जानकारी नहीं हैं। लेकिन अब खबर है कि चुनाव जल्द हो सकते हैं। माना जा रहा है कि 3 मार्च को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा हो सकती हैं। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस ने भी निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। दोनों ही पार्टियां जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में हैं।
इसी बीच खबर है कि कांग्रेस जबलपुर में भी इंदौर वाले फार्मूला लागू कर सकती हैं। दरअसल, इंदौर में विधायक को महापौर पद का टिकट देने के बाद जबलपुर में इस पद के दावेदार में बेचैनी बढ़ गई हैं। आम नेता पत्ता कटने की आशंका से परेशान हैं और विधायक इसलिए बेचैन हैं क्योंकि यहां से 4 विधायक हैं इसलिए किसे टिकट मिलेगा।
बता दे कि जबलपुर में वर्तमान में कांग्रेस के 4 विधायक हैं। अगर इंदौर के फॉर्मूले पर कांग्रेस चलती है तो इन्हीं 4 विधायकों में से किसी एक को महापौर का टिकट मिल सकता हैं। इसका मतलब ये हुआ कि बाकी नेताओं और कार्यकर्ताओं का पत्ता साफ। अब तक जो महापौर का चुनाव लड़ने का इंतज़ार कर रहे थे, वो इस रेस से बाहर कर दिए जाएंगे।
वहीं, जबलपुर पहुंची नगर निगम चुनाव प्रभारी पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे ने इस पर मोहर लगा दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा अगर सर्वमान्य सहमति बनती है तो जबलपुर में भी इंदौर का फार्मूला लागू किया जाएगा। यानि किसी विधायक को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया जा सकता हैं।
ख़ास बात ये है कि जबलपुर नगर निगम बीजेपी का गढ़ माना जाता हैं। जहां बीते 15 सालों से बीजेपी का राज रहा हैं। लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग हैं। दरअसल, साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस को भारी जीत मिली पहली बार ऐसा हुआ जब कांग्रेस के चार विधायक यहां से चुने गए। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर किसी विधायक को टिकट दिया जाता है तो वो यहां नगर सत्ता पर वापसी कर सकती हैं।




