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जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में 7.58 लाख की धोखाधड़ी करने के मामले में मैनेजर एवं सहायक अकाउंटेंट गिरफ्तार

बड़वानी से हेमंत नागझिरिया की रिपोर्ट – जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित खरगोन शाखा बड़वानी के मैनेजर मोहन पाटीदार की शिकायत पर पुलिस ने 7.58 लाख की धोखााधड़ी में बैंक के ही 2 लोगो को गिरफ्तार किया है, जबकि इस धोखाधड़ी में सम्मिलित 3 अन्य को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जायेगा।

थाना प्रभारी बड़वानी राजेश यादव से प्राप्त जानकारी अनुसार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित खरगोन शाखा बड़वानी के मैनेजर मोहन पाटीदार ने पुलिस अधीक्षक बड़वानी डीआर तेनीवार को लिखित शिकायत मय जांच रिपोर्ट के प्रस्तुत की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि शाखा में जून 2018 से अक्टूबर 2019 के बीच में पदस्थ अधिकारी पंडित गवले शाखा प्रबंधक, सतीश शर्मा सहायक अकाउंटेंट, हेमराज जाट लिपिक, गंगा यादव, देवराम कुमरावत ने आपराधिक षडयंत्र रच कर इस अवधि में 7,58,354 की राशि का गबन किया है। 

इस पर टीआई राजेश यादव ने अपनी टीम के उप निरीक्षक शिवराम निर्वेल, आरक्षक सुरेंद्र, जगजोत आदि के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच की और जांच में उपरोक्त पांचों आरोपियों के खिलाफ अपराध करने के साक्ष्य पाए जाने पर उनके खिलाफ अपराध धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी आईपीसी का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। विवेचना के दौरान आरोपी पंडित गवले एवं सतीश शर्मा को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने जुर्म स्वीकार किया। जिस पर पुलिस ने दोनों आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया है। 

गबन का तरीका था इस प्रकार

जिला सहकारी बैंक खरगोन के द्वारा करीब 2.70 लाख रुपए बड़वानी क्षेत्र की 5 सहकारी संस्थाओं को आवंटित हुए थे। जो आरोपी सतीश शर्मा एवं पंडित गवले ने उक्त राशि 5 सहकारी संस्था को आवंटित ना कर भवति की सहकारी समिति के बंद खाते में डाल दी। और बाद में उस राशि को नामदेव मिल्क एजेंसी बड़वानी के खाते में डाल कर एजेंसी मालिक को बताया गया कि गलती से आपके खाते में उक्त राशि आ गई है। इसलिये आप में उक्त राशि का चेक दे दीजिए जिससे उस राशि का समायोजन हो सके। चेक लेने के बाद इन आरोपियों ने उक्त राशि भवति समिति के अकाउंट से निकाल कर स्वयं के पास रख ली। 

इसी प्रकार इन आरोपियों ने मिली भगत कर बैंक के ग्राहक, जिनकी करीब 1.41 लाख एवं 2.54 लाख  की एफडी की राशि का भुगतान कर उसे बैंक कंप्यूटर सिस्टम में ग्राहकों के नाम से पेंडिंग बताई। व यह राशि पुनः दोनो ग्राहको के अकाउण्ट में डालकर उनसे भी चेक लेकर अपने पास राशि रख ली। इस पूरे अपराध को करने में उपरोक्त पांचों आरोपी की मिलीभगत थी क्योंकि पूरी प्रक्रिया में इन सभी की कुछ जिम्मेदारी बैंक के नियम के तहत तय थी।

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