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मध्यप्रदेश: घोटाले के ऊपर घूंसखोरी/ जांच कमेटी ही निकली घूंसखोर, तो कमलनाथ जी बताईये जनता किस पर करे भरोसा।

 

रीवा: द लोकनीति की टीम ने यह खबर सबसे पहले उठाई थी और अपने पोर्टल पर भी छापा था जिसका असर हमें देखने को तो मिला पर जो टीम जांच करने गयी थी उसके मेंबर भी दूध के धुले नहीं निकले। आखिर जनता किस पर भरोसा करे, जब चारों तरफ चोर ही चोर बैठे हों। रीवा के गंगेव पंचायत में लगभग आठ करोड़ के कराधान घोटाले का खुलासा हुआ था लेकिन फिर इसके बाद पता चला था कि गंगेव जनपद पंचायत में 12 करोड़ का कराधान घोटाला हुआ है। जांच के लिए जांच कमेटी बनायीं गयी और जांच करने के लिए भोपाल से एक टीम रवाना की गयी।

आपको बता दें कि रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत में 12 करोड़ के कराधान घोटाले की जांच कर 4 सदस्यीय टीम भोपाल वापस लौट रही थी। ग्रामीण विकास भोपाल के वित्त सलाहकार पीके मिश्रा और उनके साथ टीम के अन्य सदस्य साथ में ही थे तभी अचानक सागर जीआरपी ने रेवांचल एक्सप्रेस में छापा मारा और 5 लाख कैश बरामद किये। पूरी रात जांच-पड़ताल की गयी, इसके उपरांत प्राथमिक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें छोड़ दिया गया है।

पूरा मामला क्या था
आपको बता दें कि सितंबर महीने में कराधान योजना के तहत 38 पंचायतों को 12 करोड़ रुपए दिए गए थे। जिसमे से 6 करोड़ रुपए 3 दिन के भीतर एक बेंडर के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। बताया गया कि जिसकी शिकायत ग्रामीण विकास विभाग से की गयी थी। शिकायत मिलने पर पिछले दिनों ग्रामीण विकास विभाग भोपाल के वित्त सलाहकारों की टीम मामले की जांच करने रीवा आई थी। 26 व 27 फरवरी को गंगेव जनपद में जांच कर टीम भोपाल वापस लौट रही थी। आरोप है कि सदस्यों ने जांच को शिथिल करने के लिए सरपंच सचिवों से लाखों रुपए घूस लिए। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त और जीआरपी ने छापा मारा और उनके पास से 5 लाख रुपए कैश मिले। आरोप तो यह था की 50 लाख रूपये घूस लिया गया है। छानबीन की गयी और प्राथमिक कार्रवाई के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है। सवाल यह नहीं कि पैसा कितना मिला कितना नहीं। सवाल पारदर्शिता का है। लोग इस आशय से सरकार से शिकायत करते हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन इस तरह के हालात से सरकार व ब्यूरोक्रेसी पर सवाल तो होंगे ही।

जाग जाईये जनाब
अगर जांच करने वाला ही घूंसखोरी करते हुए पकड़ा जाता है तो जनता किस पर भरोसा करे। आखिर सारी जिम्मेदारी सरकार की होती है। सरकार ही जांच कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखती है और उन्हीं के बताये हुए नाम, जांच कमेटी के सदस्य होते हैं। अगर जांच कमेटी के मेंबर ही जांच को रफा-दफा करने के लिए घूस लेंगे, तो सवाल सरकार पर तो उठेगा ही। कमलनाथ जी इस समय मध्यप्रदेश की कमान आपके हांथ में हैं। और कुछ भी गलत होता है तो ऊँगली जनता आप पर ही उठएगी साथ ही गृहमंत्री बाला बच्चन तो लगता है चैन की नींद सो रहे हैं। उनको न तो दूर-दूर तक क्राइम के नाम सुनाई देते और न ही दिखाई। घोटाले की शिकायत करने के बाद जांच करने वाला भी घूस ले रहा है तो आप समझ जाईये कि आपका विकास मॉडल किस दिशा में जा रहा है। जनता का भरोसा कमलनाथ सरकार से टूट रहा है क्योकि जनता को जीतेंगे तो आपकी जीत होगी और अगर जनता का भरोसा टूटेगा तो आपकी सरकार भी टूट जाएगी।

 

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