लखनादौन : दो साल से खाद्यान्न न मिलने पर त्रस्त ग्रामीणों ने लगाई तहसीलदार से गुहार

– : कोरोना संकटकाल के लॉकडाउन तक में नहीं मिला राहत अनाज- : खाद्यान्न पात्रता पर्ची होने पर भी नहीं मिलता राशन – : सेल्समैन ने कथित रूप से पात्रता पर्ची को बन्द बताया – : यदि पात्रता पर्ची यदि बन्द हुई, तो क्यों और कैसे?

सिवनी/ लखनादौन से महेन्द्र सिंघ‌ नायक की रिपोर्ट – :  एक तरफ तो शासन खाद्य सुरक्षा अधिनियम के माध्यम से गरीब जनता को  एक रुपए प्रति किलो में सस्ता अनाज उपलब्ध कराता है तथा ऐसी योजनाएं संचालित करता है कि कोई व्यक्ति भूखा ना रहे, परंतु फिर भी कतिपय कारणों से अधिकांश जनता अभी भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न से वंचित है। कमाल की बात तो यह है की पात्रता पर्ची रखे होने के बावजूद भी लोग सस्ते खाद्यान्न से वंचित हैं। ऐसे में लॉकडाउन प्रभावित गरीब जनता के लिए महंगा अनाज खरीदना “दुबले पर दो आसाढ”  कहावत जैसा ही है। सबसे बड़ी विडंबना तो ये है कि इस गरीब जनता को कोरोना के संकटकाल में लगे लॉकडाउन अवधि में भी शासन की ओर से बांटे गए राहत शुरू स्वरूप अनाज से भी वंचित रहना पड़ा है।
      ये मामला सिवनी जिले की लखनादौन तहसील की ग्राम पंचायत मकरझिर का है, जहां लगभग 65 परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न से पिछले दो साल से वंचित हैं। खाद्यान्न की कमी से जूझ रहे ग्रामीणों ने थक हारकर आखिरकार तहसील की ओर रुख किया और अपना शिकायती आवेदन नायब तहसीलदार धूमा वृत के नाम सौंपा। इन ग्रामीणों को आस है कि यहाँ हमारी पुकार सुनी जायेगी।
       तहसील कार्यालय लखनादौन में आवेदन सौंपने आई महिलाओं और ग्रामीण भूरी यादव, सुनीता रजक, रामकुमार यादव, शिवकुमार रजक आदि ने बताया कि उनके ग्राम मकरझिर में रहने वाले लगभग 65 परिवारों को पिछले 2 साल से खाद्यान्न नहीं मिला है, जिसको लेकर सभी बहुत अधिक परेशान हैं। यही नहीं कोरोना संकट काल के लॉकडाउन में भी उन्हें सोसायटी या ग्राम पंचायत द्वारा किसी प्रकार का राहत खाद्यान्न नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि हमारे पास खाद्यान्न की पात्रता पर्ची होने के बाद भी शासकीय उचित मूल्य दुकान जाने पर खाली हाथ लौटाया जाता है। उचित मूल्य दुकान के सेल्समैन द्वारा पात्रता पर्ची बंद हो चुकने की बात कही जाती है और खाद्यान्न नहीं दिया जाता। कथित रूप से पर्ची बंद होने की शिकायत ग्राम पंचायत में करने पर पंचायत के सचिव अथवा सहायक सचिव द्वारा किसी प्रकार का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है। जबकि पात्रता पर्चियों में आधार कार्ड लिंक कराना व पर्चियों का सत्यापन कराना ग्राम पंचायत के सचिव की जिम्मेदारी है। यही नहीं महिलाओं ने ये भी आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों में विद्यार्थियों को बाँटे जाने वाले राशन में भी उनके बच्चों को नहीं दिया गया है।  
       इन्हीं सब मांगों को लेकर ग्राम मकरझिर की लगभग 10,12 महिलाओं और ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षरित एक शिकायती आवेदन दिनांक 16.7.2020 को नायब तहसीलदार लखनादौन धूमा वृत के लिए यह सौंपा है। जिसमें उनके द्वारा मांग की गई है कि हमारी बंद हो चुकी पर्चियों को पुनः शुरू किया जाए एवं हमें शासन की ओर से मिलने वाले सस्ते अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। क्योंकि हम गरीब जनता हैं और गरीब होने के साथ-साथ लॉकडाउन प्रभावित होने के कारण महंगा अनाज खरीद पाना हमारे लिए बहुत कठिन बात है। अत: माननीय तहसीलदार साहब के माध्यम से शासन प्रशासन से हमारी मांग है कि हमारे राशन के लिये ग्राम पंचायत को आदेशित कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली जी के अंतर्गत खाद्यान्न दिलाया जाए ताकि हम गरीब जनता को राहत मिल सके।

आवेदनकर्ता किरण यादव  ने कहा है – : 

“हम सब राशन की वजह से आए हैं। हमें राशन नहीं मिल रहा है कम से कम 2 साल हो गए, लॉकडाउन में सोसाइटी गए भी पर किसी ने नहीं दिया। कहते हैं तुम्हारी पर्ची बंद है। लेकिन 2 साल पहले तक तो राशन मिलता था।

आवेदनकर्ता सोमती राजपूत ने भी ये कहा – :

“राशन नहीं मिल रहा है कार्ड भी नहीं बना है। लॉकडाउन में गए थे की आईडी में दे दो पर नहीं दिए कहे की ग्राम पंचायत जाओ ग्राम पंचायत जाते तो कहते सोसाइटी में जाओ।”                                                                   

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