
भोपाल : बीते साल राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के कमला नेहरू के चिल्ड्रन वार्ड में भयानक आग लग गई थी। जिसमें करीब 15 नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया था। बता दे कि जिस समय चिल्ड्रन वार्ड में आग लगी थी, उस दौरान वार्ड में लगभग 40 नवजात बच्चों का इलाज किया जा रहा था। जिसमें से मौके पर 4 बच्चों की मौत की ख़बर खुद चिकिस्ता शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने दी थी। इसके बाद ये मौत का आकड़ा बढ़ते बढ़ते करीब 15-17 के आस पास तक जा पंहुचा था।
कमला नेहरू में हुए इस अग्निकांड के बाद सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठे थे, मामलें ने प्रदेश में जमकर टूल पकड़ी थी, लेकिन समय के साथ साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। दोषियों के खिलाफ क्या कार्यवाई हुई? कितने बच्चों के परिजनों को मुआवज़ा दिया गया? किसी को कुछ पता नहीं। इसी बीच प्रदेश में एक बार फिर ये मामला उठा है।
दरअसल, अब ये मामला भोपाल से कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद ने उठाया है। उन्होंने जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने सभी पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा देने, अग्निकांड के दोषी अधिकारियों पर एफआईआर करने और अस्पतालों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित कर ऐसी घटनाओं का दोहराव ना होने देने की मांग की गई है। उन्होंने इस मामले में अब तक दोषियों पर एफआईआर दर्ज ना किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कांग्रेस विधायक की दायर याचिका में कहा गया है कि हमीदिया अस्पताल में हुए अग्निकांड के वक्त अस्पताल में 40 बच्चे भर्ती थे जिनमें से 10 बच्चों की मौत गई थी और कुछ बच्चों ने भी कुछ दिनों बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया,याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सिर्फ 11 बच्चों की मौतों पर मुआवज़ा दिया और बाकी बच्चों की मौतों के बाद परिजनों को मुआवज़े की कोई राशि नहीं दी गई।
इधर, विधायक आरिफ मसूद की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा की – आखिर इस गंभीर अग्निकांड में अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई और सभी पीड़ितों को अब तक मुआवज़ा क्यों नहीं दिया गया? इस मामलें को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और स्वास्थय विभाग के आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर 2 हफ्तों में जवाब मांगा है। वहीं, इस याचिका पर अगली सुनवाई 2 हफ्ते बाद की जाएगी।