अतिथी विद्वानों के लिए सड़कों पर उतरने वाले सिंधिया खामोश, मंत्री तुलसी सिलावट बोले, बाद में सोचा जाएगा

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – कांग्रेस (Congress) छोड़ बीजेपी (BJP) में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और उनके समर्थकों के सुर अब बदले बदले दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस सरकार में रहते जिन मुद्दों पर ये पलटवार करते थे, अब इन्हें मुद्दों से इन सभी ने किनारा कर लिया हैं।
कांग्रेस में रहते हुए अतिथी विद्वानों (Guest Scholars) के नियमितिकरण पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सड़क पर उतरने की चेतावनी दी थी। सिंधिया को भाजपा में शामिल हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अब ये मुद्दे उनकी चर्चा में नहीं रहे हैं। उन्होंने इन सभी विषयों पर खामोशी ओढ़ ली हैं। बीजेपी सरकार होने के बावजूद भी सिंधिया अतिथी विद्वानों के नियमितिकरण पर खामोश हैं।
कांग्रेस छोड़ते समय सिंधिया समर्थकों की और से कहा गया था कि यहां हमारी बात नहीं सुनी जाती हैं। साथ ही सरकार (Government) ने जो वचन पत्र में कहा था उसे अब तक पूरा नहीं करा गया हैं। इसलिए हम इस्तीफा दे रहे हैं।
ईधर, बीजेपी में आते ही सिंधिया समर्थक भी इन मुद्दों से पीछे हट गए हैं। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया (Mahendra Singh Sisodia) का कहना है कि अभी तो प्राथमिकता पर कोरोना हैं। बाकी सब चीजें बाद में देखीं जाएंगी। अभी तो मंत्रिमंडल का गठन होना है, फिर इन बातों को चरणबद्ध तरीके से देखेंगे मुख्यमंत्री।
जबकि शिवराज सरकार (Shivraj Government) में मंत्री बने तुलसी सिलावट (Tulsi Silawat) ने कहा कि किसानों, गरीबों, अतिथी विद्वानों की समस्याएं दूर करने का वचन पत्र में कहा गया था लेकिन वो पूरा नहीं हुआ इसलिए हमने इस्तीफा दिया। अब मुख्यमंत्री किसानों को बोनस बांट रहे हैं, गरीबों के लिए संबल लेकर आए हैं। अभी कोरोना है, शुद्ध का युद्ध के बारे में बाद में सोचा जाएगा।



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