ये बना "सिंधिया" और उनके "समर्थकों" की "राह में रोड़ा", हाथों से "मंत्रिपद" की "कुर्सी" गई दूर

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – मध्यप्रदेश की सियासत की तस्वीर बीते एक माह के अंदर पूरी तरह से बदल गई। कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल होने वाले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके 22 समर्थकों के दिन ऐसे पलट जाएंगे, किसी ने सोचा न था।
बता दे कि अपनी विधायकी और कुछ मंत्रीपद छोड़कर सिंधिया के समर्थक बीजेपी में शामिल तो हो गए, लेकिन कोरोना वायरस ने इनकी राह में रोड़े अटका दिए। कोरोना के कारण अब मंत्री की कुर्सी भी लगातार इनसे दूर खिसकती जा रही हैं। सिंधिया को भाजपा ने तत्काल राज्यसभा का उम्मीदवार बना तो दिया लेकिन चुनाव स्थगित होने से वे भी अभी तक न सांसद बन पाए हैं और न ही केंद्रीय मंत्री।
ये प्रदेश की सियासत का पहला मौका होगा जब सिंधिया परिवार के पास कोई पद नहीं है और कांग्रेस में उनका एक भी समर्थक विधायक नहीं है।
गौरतलब है कि सिंधिया के 22 समर्थकों में दस को उपचुनाव के पहले मंत्री बनना था लेकिन कोरोना के चलते अभी तक मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया हैं। इधर, बीजेपी ने इस बात को साफ कर दिया है कि फिलहाल मंत्रिमंडल को छोटा बनाया जाएगा। कोरोना से निपटने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। ऐसे में अब सिंधिया समर्थकों के पास इंतेज़ार करने के अलावा कोई और उपाए नहीं हैं।




