बदलती राजनीति की तस्वीर:- क्या मध्यप्रदेश में एक बार फिर होने वाला है सत्ता पलट?? इन दिग्गजों का बड़ा दावा 

क्या मध्यप्रदेश में एक बार फिर होने वाला है सत्ता पलट?? इन दिग्गजों का बड़ा दावा 

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:-हाल ही में अपनी परंपरागत पार्टी कांग्रेस को छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्मदिन था.उनके जन्मदिन पर  पूर्व की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ ने सिंधिया को बधाई नहीं दी थी.लेकिन सूबे की राजनीति तब गरमा गई जब किसी जमाने ज्योतिरादित्य शागिर्द नेता कृष्णपाल सिंह यादव को भी  कमलनाथ ने जन्मदिन बधाई दे दी। इतना ही नहीं कमलनाथ ने फेसबुक पर भी यह बधाई संदेश पोस्ट किया .और तो और केपी यादव ने भी कमलनाथ द्वारा उनकी जन्मदिन की बधाई पर अपना आभार प्रकट कर दिया।, 
कमलनाथ और केपी यादव के बीच चल रहे ट्विटर ट्विटर के खेल में ट्विस्ट तब आया तब मध्यप्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी सांसद कृष्ण पाल सिंह यादव को जन्मदिन की बधाई का संदेश पोस्ट किया गया।

इन दोनों ट्वीट के आखिर क्या मायने हैं.. क्या mp की राजनीति में फिर से कोई बड़ा भूचाल आने वाला है?? 
 

बहरहाल कमलनाथ और प्रदेश कांग्रेस दवारा दी गई बधाई के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। 
वहीं हाल ही में मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद पूर्व मंत्री और जबलपुर से भाजपा विधायक अजय विश्नोई का दर्द छलका था। उन्होंने जबलपुर समेत महाकोशल के विधायकों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। 
 
 मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी को मध्यप्रदेश संगठन ने  समन जारी किया था  क्योंकि वो अलग से विंध्य प्रदेश की मांग कर रहे हैं..तो उनपर भी कार्रवाई हो सकती है.  और उनकी शिवराज के प्रति नाराजगी भी साफ नज़र आती है.. नारायण त्रिपाठी  पूर्व की कांग्रेस सरकार का कई बार समर्थन करने सुर्ख़ियो में रह चुके है

Mp कांग्रेस बार बार यह बात कहती है कि अगले 4 महीने में सत्ता में कुछ बड़े बदलाव होगें… और सज्जन सिंह वर्मा ने भी इशारो इशारों में यह बात कही थीं कि भाजपा के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं.. 

इस संभावित फेरबदल पर पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान दावा करते हुए यह कहा कि कांग्रेस फिर से सरकार बनाएगी और वो भी इसी पंचवर्षीय में 

अब आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या एक बार फिर से सत्ता पलट हो सकता है….मार्च में महज़ उन सत्रह दिन में ही सरकार बदल गई थीं.

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