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ट्वीट ,पोस्ट और शेयर करके भूल जाइये की आज महिला दिवस है !

 सोशल मीडिया के जमाने में कितना आसान हो जाता है ना की, किसी विशेष दिन को मात्र एक ट्वीट, पोस्ट या शेयर करके भूल जाना। आज 8 मार्च यानी कि विश्व महिला दिवस  है। आज के दिन हम महिलाओं का सम्मान करते हैं ,लेकिन क्या सिर्फ 1 दिन ही महिलाओं का सम्मान होना चाहिए !यह एक बड़ा सवाल है? जिसका जवाब शायद हमें अपने अंतरात्मा से ढूंढना पड़ेगा। सुबह ,शाम और देर रात तक, बिना थके, बिना कुछ मांगे ,जो काम करती है, वह है औरत। बीवी की शक्ल में ,बहन की शक्ल में या फिर मां के शक्ल में हर वक्त अपने परिवार के लिए तत्पर रहती है औरत। मगर क्या हम यानी कि पुरुष उनको जायज सम्मान दे पाते हैं जितने कि वह हकदार हैं !शायद नहीं, एक सर्वे के मुताबिक 90 फिसदी पुरुष महिलाओं के प्रति पक्षपात की भावना रखते हैं। दरअसल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के 75 देशों में किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है। 
 चलिए बात अपने घर से ही शुरु करते हैं क्याआपको नहीं लगता कि आपकी बहन को भी उतना ही मौका मिलना चाहिए जितना किआपको मिला है। 
खुद को एक्सप्रेस करने के लिए आपको आप[का परिवार पूरा मौका देता है। मगर क्या ये मौका लड़कियों के लिए नहीं होना चाहिए ?एकाध परिवार को छोड़कर के शायद ही कोई ऐसा परिवार हो, जो अपनी बेटी के फैसलों पर उसका साथ दें। नतीजा आए दिन ऑनर किलिंग जैसे मामले सामने आते हैं। 
बेटी को इज्जत से जोड़ करके देखा जाना अच्छी बात है। मगर क्या उन्हें अपने पसंद की जिंदगी जीने का हक नहीं है ?यह सवाल जवाब हम सब को देना है। 
2012 से लेकर अब तक से आज तक एक बेटी इंसाफ के लिए तरस रही है। क्या हमने उसे इंसाफ दिया ?नहीं, भारत में आए दिन दुष्कर्म के मामले सामने आते हैं। बात अगर मध्य प्रदेश की की जाए तो यहां हर दिन शहर की राजधानी भोपाल से एक लड़की गायब हो जाती है। आखिर महिला सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वादे ही क्यों करते हैं हम और हमारी सरकार उसे धरातल पर कब लाया जाएगा ? यह समझ से परे है। 
जिस देश के तथाकथित गुरु, महात्मा और नेता ही दुष्कर्मी हो वह महिला सुरक्षा  की बात करना ही बेईमानी है। महिलाओं के ऊपर सबसे ज्यादा क्रूररता  उनके पति दिखाते हैं या फिर उनके रिश्तेदार। कभी दहेज के लिए उसे मार दिया जाता है तो कभी अपनी झूठी शान के लिए। 
कुछ महिलाएं जो पढ़ लिख कर के आगे बढ़ जाती हैं। उनके साथ दुर्व्यवहार होता है, भारत में सबसे ज्यादा फिल्में बनाई जाती है। लेकिन क्या जितना पैसा एक पुरुष अभिनेता को मिलता है उतना एक महिला अभिनेत्री को मिल पाता है ?काम दोनों का तो बराबर ही है मगर पैसों में फर्क है। ऐसा क्यों 
 सोशल मीडिया से नजर हटाइए और सबसे पहले अपने घर से ही शुरुआत कीजिए। अपनी मां ,बहनऔर बीवी का शुक्रिया अदा कीजिए। उन्हें खुद को एक्सप्रेस करने का एक मौका दीजिए। उन्हें उनकी जिंदगी जीने का एक मौका जरूर दीजिए ,अगर वह काम करना चाहती हैं तो उन्हें काम करने दीजिये।  जब तक हम अपनी आधी आबादी को बराबरी का हक नहीं देंगे ,तबतक समाज में समानता नहीं आ पाएगी।

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