हमला अकेले JNU पर नहीं है! आज गुजरात पुलिस ने IIM अहमदाबाद में घुस कर IIM लोकतंत्र के साथ खड़ा है शीर्षक कार्यक्रम होने से भी रोका है!

हमला अकेले JNU पर नहीं है! आज गुजरात पुलिस ने IIM अहमदाबाद में घुस कर IIM लोकतंत्र के साथ खड़ा है शीर्षक कार्यक्रम होने से भी रोका है!

 

शशांक तिवारी की यह रिपोर्ट

 

100 से ज़्यादा मुखौटे वाले आतंकवादी पूरी तरह से बंद, हर द्वार पर सुरक्षा वाले जेएनयू में घुसते हैं। फिर सब पर बर्बर हमला शुरू करते हैं, प्रोफ़ेसर्स पर भी।

आप सभी ठंड में अपने अपने घर पर सो रहे होंगे लेकिन आपको यह नहीं मालूम कि आज की रात देश की शिक्षा पर काली रात है

शिक्षा  हासिल कर बड़े बड़े पद पर बैठने वाले पुलिस अफसर से लेकर ब्यूरोक्रेट्स को आज देखना और सुनना दोनों चाहिए क्योंकि आज देश में ना सिर्फ जेएनयू पर हमला हुआ है बल्कि चारों तरफ जहां जहां छात्र शिक्षा बेरोजगारी और सरकार से सवाल पूछते हैं

तो उस सरकार के नुमाइंदे किस तरीके से उनकी पिटाई कर देते हैं माना कि आप की विचारधारा एक कुछ अलग होगी और इन छात्रों की कुछ और अलग होगी

लेकिन गांधी के उस देश में जहां अहिंसा का पाठ पढ़ाया जाता है उसी देश पर छात्रों पर ऐसी हिंसा कि उनका रोड से सर खोल देना खून की नदियां शिक्षा के मंदिर पर बहा देना हमारे नेता राजनीति और संविधान वाले इस देश में सचमुच एक काला दिन साबित हो रही है |

बस संयोग? या साज़िश?

और ना सिर्फ मैं यहां जेएनयू की बात करूंगा बल्कि आज की ही एक खबर है गुजरात के iim-ahmedabad की है खबर जहां आईआईएम अहमदाबाद के छात्रों का यह आयोजन आई आई एम लोकतंत्र के लिए खड़ा है उसे ध्वस्त करने के लिए पुलिसकर्मियों की एक टीम ने रविवार शाम को भारतीय प्रबंधन संस्थान में प्रवेश किया और छात्रों द्वारा कथित रूप से आयोजन को बंद भी करवा दिया गया अब आप मुझे बता दें कि हम किस देश में जी रहे हैं जब हमारे प्रधानमंत्री हाउ डू मोदी जैसे प्रोग्रामों में जाकर कह देते हैं सब चंगा सी और जब हम अपने देश में छात्रों की आवाज को नहीं सुन सकते तो किसकी आवाज सुनेंगे आप अपने देश में बेटी तो बेटी लड़के तो लड़के छात्र तो छात्र आखिर  सुरक्षित कौन है? क्या हम और आप में कुछ अंतर है कोई सांप्रदायिक घटना होती हैं तो उसका तूल पकड़ कर राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने एंगल से उसका इस्तेमाल करती हैं लेकिन आज देश के छात्रों पर हमला हुआ है हर छात्र जो शिक्षा हासिल करता है कुछ ना कुछ बनने की चाह रखता है आज उसे अपने भविष्य के लिए जरुर सोचना होगा क्या वे उस देश में जीना चाहता है ? जहां छात्रों की आवाज दबा दी जाती है ऐसे गुंडागर्दी आतंकवादियों द्वारा मारा-पीटा जाता है

ठीक इसी वक़्त नॉर्थ गेट पर हिंसक भीड़ इकट्ठा होती है, और बत्तियाँ बंद कर अंधेरा कर दिया जाता है।
बस संयोग? या साज़िश?

संपर्क करने पर अहमदाबाद पुलिस आयुक्त आशीष भाटिया ने इस बात से इनकार किया कि पुलिस परिसर में प्रवेश कर गई है। उन्होंने डीएच को बताया, “कोई भी परिसर के अंदर नहीं गया। कुछ अधिकारी संस्थान के प्रवेश द्वार के पास नहीं बल्कि अंदर गए।”

 

जामिया भी JNU भी IIT भी ,IIM भी अब मारने को बचा क्या ???

#पोरस को बता दें ये #सिकंदर को बता दें,
#क़तरा है मगर फिर भी #समंदर को बता दें.,,

#छात्र #ज़ुल्म के आगे ना #झुके थे ना झुकेंगे.
ये बात चलो वक़्त के #हिटलर को बता दें..!!

Exit mobile version