
भोपाल : CM शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी CPA को भारी पड़ी। 62 साल पुराने CPA (राजधानी परियोजना प्रशासन) का इतिहास सिर्फ 20 सेकंड में खत्म हो गया।
बता दे कि राजधानी की 8% सड़कों की देखरेख करने वाला CPA अब 3 विभागों में बंट गया। PWD, वन विभाग और भोपाल गैस राहत एवं पुर्नवास विभाग इसके कामकाज को देखेगा। सबसे बड़ी जिम्मेदारी PWD को दी गई हैं। बिल्डिंगों और सड़कों की देखरेख यही विभाग करेगा।
पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने बताया, 31 मार्च को सीपीए को हैंडओवर कर लेंगे। इससे पहले 7 मार्च को संबंधित अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। इसमें उनकी जिम्मेदारी तय कर देंगे। सड़क, ब्रिज और बिल्डिंगों को लेकर वर्क डिस्ट्रीब्यूशन किया जाएगा।
कहा जा रहा है कि सबसे बड़ी चुनौती एनेक्सी (मंत्रालय) को संभालने की रहेगी, क्योंकि अक्सर लिफ्ट बंद होने पर अफसर रडार पर आ चुके हैं। इधर, वन विभाग 132 एकड़ में फैले एकांत, प्रियदर्शनी, चिनार, मयूर, प्रकाश तरण पुष्कर समेत 7 बड़े पार्कों की देखरेख के लिए प्लान तैयार कर रहा है। पहले ये पार्क निगम के हवाले होने वाले थे, लेकिन मुहर वन विभाग पर लगी।
दरअसल, पिछले साल बारिश के दौरान राजधानी की सड़कें सरकार के दामन पर दाग बन गई थी। 50% सड़कें ऐसी थीं, जो बारिश में उखड़ चुकी थी। जिसके बाद सीएम ने नाराज़गी जताई थी।
शहर में 92% सड़कें नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और बीडीए की है। सिर्फ 8% ही हिस्सा सीपीए का था। उनमें भी कई सड़कें बेहतर स्थिति में थी। बावजूद सड़कों के मुद्दे पर सीपीए नप गया।