मैं किसी भी पद पर रहने के इच्छुक नहीं, दिल्ली में संतुष्ट था : कमलनाथ

भोपाल : मध्यप्रदेश में साल 2018 में कमलनाथ के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस की 15 साल बाद सत्ता में वापसी हुई थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव के कारण मार्च 2020 में कमलनाथ को अपनी सरकार गंवानी पड़ी। अभी कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष तो है इसके साथ ही वो नेता प्रतिपक्ष की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

चर्चा है कि आने वाले दिनों में कमलनाथ के पास केवल एक ही जिम्मेदारी रह जाएगी। संगठन की जिम्मेदारी किसी नए व्यक्ति को दी जाएगी, ताकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी में नया जोश भरा जा सके और कांग्रेस भाजपा से मुकाबला कर सके। 

इसी बीच कमलनाथ ने सनसनीखेज बयान दिया है। कमलनाथ ने कहा कि वो खुद किसी भी पद पर रहने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने 2018 में भी प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनने की अर्जी नहीं दी थी।

कमलनाथ ने कहा कि मैं जब 2018 में अध्यक्ष बना था तब भी मैने नहीं कहा था कि अध्यक्ष बना दो। मैं तो संतुष्ट था दिल्ली में, पर 1 मई 2018 से जब मैं यहां शिफ्ट हुआ तो चीजें बदल गईं। मैं नेता प्रतिपक्ष और अध्यक्ष आज से नहीं, दो साल से हूं।

गौरतलब है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस संगठन में बड़े स्तर पर सर्जरी की तैयारी चल रही है। जमीन पर कांग्रेस को मजबूती देने की रणनीति तैयार की जा रही है। कहा जा रहा है कि कमलनाथ से प्रदेशाध्यक्ष पद वापस लिया जा सकता है। बाहरहाल, कमलनाथ के इस बयान से प्रदेश की सियासत अभी गरमाई हुई है।

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