"कर्ज पर निर्भर मध्यप्रदेश" कैसे बनेगा "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश"

By: Anjali Kushwaha

भोपाल: मध्यप्रदेश का राजकोष खाली है. कमाई से ज्यादा खर्च है,  राज्य का इस साल का जितना बजट है, उससे ज्यादा कर्ज है और कर्ज पर ब्याज का बोझ भी है. कर्ज पर निर्भर मप्र ऐसे में कैसे आत्मनिर्भर मप्र बन पायेगा। जानकारी के मुताबिक 02 अगस्त 2021 तक मध्यप्रदेश पर लगभग 2 लाख 24 हजार करोड़ से ऊपर का कर्ज़ हो चुका है. सरकार वेतन बांटने और प्रशासनिक व्यय के लिये प्रतिमाह दो हज़ार करोड़ का कर्ज़ ले रही है प्रदेश के अधिकांश निगम, मंडल घाटे में चल रहे हैं.

कांग्रेस के पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी ने भी मध्य प्रदेश सरकार पर क़र्ज़ को लेकर ट्वीट करते हुए निशाना साधा हैं. उन्होंने लिखा की मप्र सरकार पर 2.53 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज हो चुका है. सरकार प्रति घंटे 2.5 करोड़ का ब्याज भर रही है. बावजूद इसके शिव'राज 100 करोड़ का टर्बो जेट प्लेन खरीद रहा है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसते हुए लिखा-  महामारी/महंगाई से बदहाल जनता की गाढ़ी कमाई, सरकार के ऐशो-आराम पर क्यों उड़ाई जा रही है?

उन्होंने मध्यप्रदेश की स्थिति के बारे में लिखा- ये कैसा कंगाल/बदहाल प्रदेश बना दिया? मप्र सरकार पर मार्च 2021 तक 2.53 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज हो चुका है. पिछले 1.5 वर्ष में ही 32 बार में 49,800 करोड़ से अधिक कर्ज लिया गया. इस हिसाब से मप्र के हर नागरिक पर 30 हजार से अधिक का कर्ज हो गया है.

फ़िलहाल इन आकड़ों के हिसाब से मध्य प्रदेश की स्थिति काफ़ी चिंताजनक हो गयी हैं.

 

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