फालेन आउट अतिथि विद्वानों ने सरकार को दी धरने की चुनौती, "शिवराज महाराज" के बदलते चेहरे से परेशान अतिथि विद्वानों ने की इच्छा मृत्यु की मांग… 

फालेन आउट अतिथि विद्वानों ने सरकार को दी धरने की चुनौती, “शिवराज महाराज” के बदलते चेहरे से परेशान अतिथि विद्वानों ने की इच्छा मृत्यु की मांग… 

 भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार आए मार्च में पूरे 1 साल हो जाएंगे. जब सत्ता में उनकी सरकार नहीं थी तो वह धरना स्थल पर जाकर अतिथि विद्वानों को आश्वस्त कराया करते थे कि सत्ता में एक बार उनकी सरकार वापस आ जाएगी तो सबसे पहला काम अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण होगा पर अब यह क्या देखने को मिल रहा है.. 
 शिवराज की सत्ता में वापसी हो गई. उपचुनाव में भी उन्होंने 28 सीटों में से 19 सीटों पर जीत दर्ज कराई. पर यह क्या शिवराज सिंह चौहान के सारे वादे धरे के धरे रह गए हैं.. 
 ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अतिथि विद्वानों का साथ देने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही थी पर सड़क पर उतरने को क्या वह तो अपने घर से बाहर तक नहीं निकल रहे हैं कि एक बार अतिथि विद्वानों का हाल तक जान सके… 
 यह वही नेता और मंत्री है जो चुनाव के वक्त जनता के दरवाजे पर घूमते रहते हैं पर चुनाव खत्म हुआ तो जनता के और जनता की परेशानियां क्या इन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता है.. अतिथि विद्वानों का कहना है कि अभी भी सरकार ने अगर उनका नियमितीकरण नहीं कराया तो वह सरकार की इच्छा से जान दे देंगे बता दे कि फॉलन अतिथि विद्वानों ने इच्छा मृत्यु की मांग की है, 
 अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में शिवराज के राज में अतिथि विद्वानों की और कितनी दुर्दशा होने वाली है.

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