
किसान संगठनों पर चक्रव्यूह रचने का किया जा रहा है प्रयास, सरकार ने किसानों को पत्र भेजा, कही ये बात, किसान हुए आक्रोशित
नई दिल्ली / गरिमा श्रीवास्तव:- देश में 26 नवंबर से किसान संगठन देशभर में किसान आंदोलन कर रहे हैं उनकी मांग है कि कृषि कानून बिल को सरकार पूरी तरह से खत्म करें पर सरकार इस बिल को लेकर संशोधन करने को तैयार है लेकिन पूरी तरह से खत्म करने को तैयार नहीं.. सरकार के साथ पूर्व में किसानों की चर्चा भी हुई पर कोई भी हल निकल कर सामने नहीं आया… किसानों का आंदोलन दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है इसी बीच आज किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्य श्रवण सिंह पंढेर ने बताया कि सरकार की तरफ से एक खत आया कि अगर आप कृषि कानून वापस लेने वाली बात से पीछे हटकर संशोधन करने के लिए बात करना चाहते हैं तो समय और तारीख दो। किसान संगठनों पर चक्रव्यूह रचने का प्रयास किया जा रहा है.
एक तरफ जहां देशभर में लाखों किसान इस बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं तो वही कुछ किसान अब इसी कानून के पक्ष में सड़क पर उतर आए..
उत्तर प्रदेश में किसानों ने गौतमबुद्धनगर में कृषि कानूनों के समर्थन में ट्रैक्टर रैली निकाली।
एक किसान ने कहा, “सरकार ने जो कानून पास किए हैं हम इसके समर्थन में दिल्ली जा रहे हैं। मेरी बॉर्डर पर बैठे किसानों से अपील है कि वे कानूनों को बारीकी से समझें। हमें पुलिस ने रोका है।”
किसान आंदोलन को लेकर आज आप नेता राघव चड्ढा ने अपना तर्क रखते हुए कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के साथ संवाद को अहम की लड़ाई बना लिया है। सरकार को उनकी बात स्वीकार करनी चाहिए। आज दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। बहुत दुखद दृश्य है। मोदी सरकार को इसी समय किसानों की सारी मांगों को मान लेना चाहिए.
अब देखना यह होगा कि मोदी सरकार कृषि कानून पर किस तरह से किसानों को मनाएगी.. क्योंकि संशोधन को लेकर किसान हर हाल में मरने को तैयार नहीं है…