
सिहोरा : देखें video आदिवासी छात्रों का दर्द उन्हीं की जुबानी, कोविड-19 काल में सरकार ने बंद कर दिए छात्रावास भविष्य हो रहा बर्बाद
- जबलपुर में महावि़द्यालयों में पढने वाले डिंडोरी, मंडला,अनूपपुर , शहडोल ,दमोह,नरसिंहपुर ,बालाघाट,कटनी,सिहोरा,कुंडम के हजारों छात्र हो रहे परेशान
- हॉस्टल नहीं मिलने से सैकड़ो छात्र छात्राओं का बर्बाद हो रहा भविष्य
- ग्रामीण आदिवासी युवाओं को कोचिंग करने में करना पड़ता है रोज़ाना सफर
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द लोकनीति डेस्क सिहोरा
भारत के PM मोदी कहते है। युवा देश की शक्ति है ,इनमें गजब की ऊर्जा और कुछ कर गुजरने की चाहत होती है। एकतरफ़ देश में शिक्षा बजट पहले से कम कर दिया गया। और अब दूसरी तरफ़ ताज़ा जानकारी में मध्यप्रदेश के आदिवासी छात्र -छात्राऐं हॉस्टल के लिए दर -बदर भटक रहे है। आदिवासी छात्रों का दर्द है कि सरकार एकतरफ तो कोविड काल के दौरान,आदिवासी छात्रावासों को बंद कर दिया। वही अब नई गाइडलाइन्स में शॉपिंग मॉल ,मेले, जिम,स्विमिंग पूल सहित दूसरे व्यवसायिक संस्थान खोल दिए गए है लेकिन अभी तक कॉलेज और महाविद्यालों के छात्रावासों को क्यों बंद रखा गया है। आदिवासी जिलों से पढ़ने आने वाले इन छात्र छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि छात्रावास नहीं खुलने से उनका भविष्य बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है।
अनुसूचित जाति जनजाति छात्र संघ जबलपुर अध्यक्ष शुभम चौधरी ने बताया कि कोरोना काल के दौरान जितने प्री मैटिक और पोस्ट मैटिक छात्रावासों का संचालन बंद कर दिया गया था। इन छात्रावासों में रहने वाले आदिवासी छात्र अब कोचिंग और काॅलेज की शिक्षा लेने के लिए परेशान हो रहे हैं। चूंकि बहुत समय हो गया है , अब आफ लाइन क्लासेस सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में भी शुरू हो चुकी हैं। इन छात्रावासों में हजारों की संख्या में पढने वाले आदिवासी छात्र अब क्लासेस और कोचिंग नहीं ले पा रहे हैं , जिसके कारण इनका भविष्य अंधकार में जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि जब सब कुछ खुल चुका है तो छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द छात्रावास खाले जाने की मांग को लेकर सिहेारा विधायक नंदनी मरावी को आदिवासी छात्र छा़त्राओं ने ज्ञापन सौंपा।
आदिवासी छात्राएं बोली गांव में नहीं है बिजली न मोबाइल का नेटवर्क, कैसे पूरी होगी आगे की पढाई
डिंडोरी से आई आरती तिलगाम ने बताया कि आनलाइन क्लासेस शुरू तो हो गई हैं, लेकिन आपको बता दूं कि मैं खुद आदिवासी जिले के ग्राम कमरासोरा से आती हूं वहां बिजली की सुविधा नहीं है, मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं रहता जिसके कारण आॅन लाइन क्लासेस में शामिल नहीं हो पाते। काॅलेज के असाइनमेन्ट और नोटृस का काम पूरा नहीं हो पाता। हमें जबलपुर के हास्टल में रहना बहुत जरूरी हो गया है। आदिवासी क्षेत्र मंडला के नैनपुर पिंडरई के पास ग्राम जैतपुरी से आई आदिवासी छात्रा कीर्ति झारिया बताती हैं कि बस नहीं चलने के कारण जबलपुर आने के लिए दो बार आॅटो बदलना पडता है, तब कहीं जाकर मैं जबलपुर आ पाती हूं, स्पिल और दूसरी चीजें जमा करने काॅलेज पहुंचने में आए दिन लेट हो जाती हूं और कई दिक्कतों से रोजाना जूझना पडता है।
विधायक नंदनी मरावी का सौंपा ज्ञापन
आदिवासी छात्र छा़त्राओं महेश अहिरवार दमोह, सतीश झारिया डिंडारेी, जितेंद्र मरावी कुंडम, महेंद्र अहिरवार दमोह, सुरेंद्र बरकडे मंडला, उमेश वर्मा सिंगरौली, अंजना कुंभारे पन्ना, रूकमणि मरकाम जबलपुर, राहुल पांद्रे सिवनी, प्रियंका झारिया डिंडोरी, सौरभ चैधरी जबलपुर, परमेंद्र धुर्वे मंडला ने प्री और पोस्ट मैटिक छात्रावास चालू कराने की मंांग को लेकर सिहोरा विधायक नंदनी मरावी को ज्ञापन सौंपा। विधायक ने छात्र छात्राओं का आश्वस्त किया कि वे उज्जैन में सीएम शिवराज सिह चैहान को कोविड काल में बंद पडे छात्रावासों को चालू कराने को लेकर चर्चा करेंगी।