
गोडसे,गोपाल और कपिल देश में रहना हैं तो इनकी आदत डालनी होगी
- कोई विचारधारा कितनी खतरनाक हो सकती है इसका अंदाजा अब लग रहा है।
द लोकनीति के लिए लोकेश कोचले की विशेष रिपोर्ट
धीरे धीरे हमारा सेक्युलर देश कट्टर विचारधारा वाले देश में परिवर्तित हो रहा है। जहां सेक्युलर शब्द के लिए कोई स्थान नहीं है।
यहां आप को वही बोलना होगा जो एक मुख्य विचारधारा के लोग सुनना चाहते हैं। इससे अलग यदि आप बोलते हैं तो आपको देश बदलना होगा।
क्योंकि यदि आप संविधान सम्मत विचार रखते हैं तो आप देशद्रोही माने जायेंगे और आपको देश से निकलने के लिए विवश किया जायेगा।
हमारा देश समानतावादी है जहां सभी धर्म के लोगों को जीने का अधिकार है, रहने का अधिकार है, अभिव्यक्ति का अधिकार है और यह सारे अधिकार हमे इस देश के संविधान से मिले।फिर यह सोच कैसे पनप रही है यह लोग कहां से आए यह विचारधारा कहां से आईक्या हम उसी देश में जी रहे हैं जहां हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई भाई जैसे नारे लगाए जाते हैं।
वैसे यह नारे भी क्यों लगाए गए
क्यों ऐसा दिखाया जाता है कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में भाई भाई हैं।
इस नारे की जरूरत क्यों पड़ी
क्या यह बताना जरूरी है कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में भाई भाई हैं।
जब हम यह कहते हैं तब हम कहीं ना कहीं यह भाव लाते हैं कि हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई अलग अलग है।
काश कि हमें इस नारे की जरूरत ही नहीं पड़ती।
यदि हम इस देश के संविधान को ही हमारे देश का धार्मिक ग्रंथ माने यदि हम हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई के स्थान पर स्वयं को भारतीय मानेए यदि हम इस देश को हिंदुस्तान की जगह भारत कहे तो मैं समझता हूं कि इस देश में अराजकता का कोई स्थान ही नहीं बचेगा।
तब हमें उस नारे की जरूरत भी नही होगी जिसमें हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई को आपस में भाई.भाई बताया गया हैं।
लेकिन वर्तमान परिदृश्य कुछ और ही है और इस परिदृश्य को जन्म देने वाले भी हम ही लोग हैं।
हम ही किसी नकारात्मक सोच के व्यक्ति को या किसी नकारात्मक सोच को इतना तूल देते हैं कि वह नकारात्मकता हमारे जहन में उतर जाती है जिसका परिणाम कभी गोडसे कभी गोपाल तो कभी कपिल के रूप में सामने आता है ।
और उससे भी ज्यादा भयावह स्थिति तब बनती है जब गोडसे गोपाल और कपिल के पीछे खड़ी पुलिस हाथ बांधे मुंह पर चुप्पी साधे खड़ी रहती है।
हमने इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी की जिस संविधान की वजह से इस देश को पहचाना जाता है।
जिस देश को एक महान लोकतंत्र के रूप में जिस संविधान ने पहचान दिलाई वही संविधान आज खतरे में है।
क्योंकि देश का संविधान ऐसी विचारधारा वाले लोगों के हाथ में है जो देश की संविधान की मूल भावना को ही नहीं मानते जो देश के संविधान की मूल भावना के विपरीत कार्य करने वाले लोग हैं वह लोग यदि संविधान हाथ में आए तो उसे जरूर बदलेंगे ही।