
मध्यप्रदेश/भोपाल – बुुुधवार को हिंदू महासभा के नेता बाबूलाल चौरसिया ने दोबारा कांग्रेस का हाथ थामा। ग्वालियर के वार्ड नंबर 44 से हिंदू महासभा की टिकट पर पार्षद बने बाबूलाल चौरसिया ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।
नगरीय निकाय चुनाव से ठीक पहले हुई इनकी कांग्रेस में कांग्रेस की वापसी पर प्रदेश की सियासत गरमा गई हैं। बीजेपी को तो मानो बैठे-बिठाए एक मुद्दा ही मिल गया। जबकि कांग्रेस में चल रही सियासी अनबन का भी खुलासा हुआ।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अरुण यादव ने एक ट्वीट कर कमलनाथ के इस फ़ैसले का विरोध किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा की – ‘बापू हम शर्मिंदा हैं। महात्मा गांधी अमर रहे।
हालांकि, दक्षिण पश्चिम से कांग्रेस के विधायक प्रवीण पाठक ने अरुण यादव के ट्वीट पर वार करते हुए कहा कि गांधी आज शर्मिंदा नहीं बल्कि खुश हुए होंगे। गोडसे की विचारधारा के ऊपर गांधी की विचारधारा हावी होती आज साफ तौर पर दिखाई दे रही हैं। गोडसे की दरिंदगी को छोड़कर गांधी की अहिंसा की ओर लौटने की शुरुआत हो चुकी है और इस परिवर्तन की शुरुआत ग्वालियर से हुई हैं।
बता दे कि बाबूलाल चौरसिया पहले कांग्रेस में ही थे, लेकिन पीछले नगरीय निकाय चुनाव में वार्ड 44 से कांग्रेस से टिकट न मिलने पर वो हिंदू महासभा में शामिल हो गए थे। हिंदू महासभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद बाबूलाल चौरसिया ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के मंदिर बनाने की मांग की थी।
नाथूराम गोडसे के मंदिर बनाने की मांग करने वाले अब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए हैं। जबकि कांग्रेस पार्टी हमेशा से गोडसे नाम से गुरेज करती आई हैं।