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भीख देना भी हो गया डिजिटल, छुट्टे का बहाना बनाने वालों को देनी पड़ेगी भीख, गले में लटकाकर घूमता है क्यूआर कोड….

भीख देना भी हो गया डिजिटल, छुट्टे का बहाना बनाने वालों को देनी पड़ेगी भीख, गले में लटकाकर घूमता है क्यूआर कोड….

 

 छिंदवाड़ा:- देश डिजिटल इंडिया की तरफ लगातार बढ़ रहा है इसी बीच सोशल मीडिया पर एक बिहारी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वजह यह है कि वह भिखारी भीख मांगने के लिए अपने गले में क्यूआर कोड लटका कर घूम रहा है.

 जब लोग छुट्टे नहीं होने का बहाना बनाते हैं तो भिखारी कहता है कि QR कोड के माध्यम से पैसे दे दे.

 भिखारी नहीं है बात भी बताई के डिजिटल होने के बाद से उसकी कमाई भी बढ़ गई है पहले जहां लोग 1-2 के सिक्के थमा कर चले जाते थे अब वह लोग ₹5 से कम ट्रांसफर नहीं करते.

 डिजिटली भीख लेने वाला यह शख्स छिंदवाड़ा का हेमंत सूर्यवंशी है. हेमंत नगर पालिका का कर्मचारी था लेकिन जब उसकी नौकरी चली गई तो उसने भीख मांगना शुरू कर दिया.

 

 हेमंत के भीख मांगने का अंदाज भी काफी जुदा है वह कहता है कि बाबू जी अगर छुट्टे नहीं है तो फोन पे या गूगल पे पर भीख दे दो.

 अहमद ने बताया कि पहले वह नौकरी करता था लेकिन जब उसकी नगर पालिका से नौकरी चली गई तो वह गम में इधर-उधर भटकने लगा और फिर जीने के लिए उसने भीख मांगना शुरू कर दिया. हाथ में मोबाइल और बारकोड लेकर हेमंत डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ चुका है.

 

 हेमंत को बारकोड से भीख मांगने का आईडिया एक दुकानदार के माध्यम से मिला. वह अक्सर देखा करता था कि लोग बारकोड स्कैन करके पैसे ट्रांसफर करते थे जिसके बाद वह दुकानदार के पास पहुंचा और उसने पूरा मामला समझा और फिर उसने उसका क्यूआर कोड लिया और उसी क्यूआर कोड से भीख मांगना शुरू कर दिया. हेमंत के भीख का पैसा भी उसी दुकानदार के खाते में जमा होता है.

 हेमन्त कहता है कि उसे कितना पैसा मिल रहा है उसका अंदाजा नहीं है लोग 5-10-20 क्यों बार कोर्ट के माध्यम से दे देते हैं जिससे वह अपने परिवार का पेट भर रहा है 

 लोग जो भी पैसे देते हैं वह चौपाटी स्वीट कॉर्नर पर जमा हो जाता है और शाम को वह दुकानदार उसे नकद रुपए दे देता है.

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