पहले कोरोना ने की पढ़ाई चौपट, अब लापरवाह शिक्षक कर रहे बच्चों का भविष्य अन्धकारमय

- पढ़ाई के समय में शालाओं में लटकते हैं ताले
सिवनी/महेंद्र सिंह नायक की रिपोर्ट :- डेढ़ साल लम्बे चले कोरोना संकट के बाद अब जिन्दगी धीरे धीरे सामान्य होने लगी है, ऐसे में मानव जीवन की मौलिक आवश्यकता शिक्षा को भी शनैः शनैः पटरी पर लाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। राज्य शासन के आदेशानुसार 1 सितम्बर 2021 से कक्षा 6 के ऊपर के सभी उच्चतर व माध्यमिक स्कूल कोरोना के निर्धारित मानदंड के आधार पर खोल दिये गये हैं, सम्भव है जल्दी ही प्राथमिक स्कूल भी खोले जायेंगे। खोले गए स्कूलों में विद्यार्थी अब आने लगे हैं व पढ़ाई फिर से होने लगी है। उम्मीद है कि जल्द ही शिक्षा व्यवस्था मुख्यधारा पर वापस आ जायेगी। पर सिवनी जिले की लखनादौन तहसील में कुछ ऐसे स्कूल भी हैं जो शिक्षकों लापरवाही व उदासीनता से भलीभाँति संचालित नहीं हो पा रहे हैं। या तो ये खोले ही नहीं जाते हैं, या समय से बहुत पहले ही बन्द कर दिए जाते हैं। शाला संचालन के निर्धारित समय 10:30 से लेकर 4:40 को ताक पर रखकर लखनादौन तहसील के धूमा क्षेत्र अन्तर्गत शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला चौकी, शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला रायचौर माल एवं शासकीय माध्यमिक शाला धारपाठा सहित कई माध्यमिक शालायें ऐसी हैं जो खुलती ही नहीं हैं, और यदि खुल भी गईं तो एक-दो बजे तक ताला लटक जाता है। कोरोना संकट आने के साथ ही गत वर्ष 2020 के मार्च माह से लेकर अब तक सभी शिक्षण संस्थान बन्द रहे हैं। जिसके कारण देश का भविष्य माने जाने वाले बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब जबकि उन्हें दोबारा पढ़ लिख कर सक्षम बनने का अवसर शासन ने दिया है तब शिक्षकों की उदासीनता उनके भविष्य पर कुठाराघात कर रही है।

शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला चौकी के नहीं खुलते ताले
जनशिक्षा केन्द्र बैगापिपरिया अन्तर्गत आने वाली शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला चौकी में ताला जड़ा मिलता है। दिनांक 07/09/2021 को दोपहर 2:14 बजे देखा गया तो वहाँ पर मेन गेट से लेकर शाला प्रवेश द्वार सभी जगह ताला लगा हुआ था। आसपास न बच्चे दिखे, ना ही विद्यालय से सम्बन्धित कोई स्टॉफ। यहाँ पदस्थ शिक्षक श्री टेकसिंह परस्ते से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने इलाज कराने जबलपुर जाने की बात की। सोचने की बात है कि क्या अपने व्यक्तिगत कार्य या स्वास्थ्य आदि के लिए शासकीय शाला को बन्द रखा जा सकता है? जबकि उक्त माध्यमिक शाला व प्राथमिक शाला एक ही परिसर में हैं, ऐसे में श्री परस्ते चाहते तो प्राथमिक शिक्षक को वैकल्पिक तौर पर शाला संचालित करने का दायित्व दे सकते थे।
इनका कहना है:
“मेरी तबियत खराब है, इलाज कराने जबलपुर आया हूँ। मैं नहीं रहूँगा तो शाला बन्द ही रहेगी।”
टेकसिंह परस्ते, माध्यमिक शिक्षक

शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला रायचौर माल में भी ताला
जिले के अन्तिम छोर पर स्थित सुदूर वनांचल की शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला रायचौर माल की भी यही स्थिति है। दूर की शाला होने से यहाँ भी जमकर लापरवाही देखने को मिलती है। दिनांक 10/09/2021 को दोपहर 2:56 बजे द लोकनीति की टीम जब शाला पहुँची तो वहाँ पर भी ताला लगा हुआ था। पदस्थ शिक्षक अथवा बच्चों का आसपास कोई नामोनिशान नहीं था। शाला बन्द रहने का कारण जानने के लिए जब यहाँ पदस्थ शिक्षक श्री रामप्रताप उईके से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन ही नहीं रिसीव किया गया, यही नहीं व्हाट्सएप पर शाला बन्द होने के विषय पर मैसेज दिया गया तो भी उनके द्वारा देखकर भी चुप्पी साध ली गई।

समय से पहले ही बन्द हो जाती है शासकीय उन्नयन माध्यमिक शाला धारपाठा
राष्ट्रीय राजमार्ग की शाला धारपाठा भी पदस्थ शिक्षिका की उदासीनता के चलते समय पूर्व ही बन्द कर दी जाती है। दिनांक 11/09/2021 को 2:55 बजे ही शाला बन्द कर ताला जड़ दिया गया था। यहाँ पदस्थ शिक्षिका श्रीमति सनिया वाडिवा से कारण जानने हेतु फोन पर सम्पर्क करने पर उनके द्वारा भी फोन रिसीव नहीं किया गया, व्हाट्सएप पर भी उनके द्वारा स्कूल के असमय बन्द होने की सूचना देने पर भी मैसेज देखकर भी उत्तर नहीं दिया गया।
इस तरह स्कूल ना खोलकर अथवा निर्धारित समय 4:40 बजे से समयपूर्व बन्द कर शिक्षकगण पहले ही शिक्षा में कमजोर हो चुके बच्चों के भविष्य को अन्धकारमय बना रहे हैं। सोचनीय बात है कि कोरोनाकाल के चलते पिछले डेढ़ साल से आराम कर रहे शिक्षकों को शायद आरामतलबी की आदत लग गई है। इनकी इस लापरवाही से इन्हें तो सुख मिल सकता है, पर मासूम बच्चों का भावी जीवन तो नर्कमय बन रहा है।
इस स्थिति पर जनशिक्षा केन्द्र के उच्चाधिकारियों को संज्ञान लेकर सतत निरीक्षण करने की आवश्यकता है। क्योंकि दूषित हो रही शिक्षा व्यवस्था कड़े कदम उठाने पर ही मुख्यधारा में आ पायेगी।
विकासखण्ड लखनादौन के सम्वेदनशील बीआरसी श्री पवन यादव ऐसी लापरवाही व उदासीनता पर काफी सख्त माने जाते हैं। उन्होंने तो दो टूक शब्दों में लापरवाही पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना है कि कितने जल्दी तहसील लखनादौन की शालायें नियमानुसार आदर्श रूप में सामने आती हैं।
इनका कहना है:
“अभी हाल ही में एक शिक्षक पर कार्यवाही की गई है। स्कूल ना खुलने या असमय बन्द होने पर सम्बंधितों पर तत्काल कार्यवाही की जायेगी।”
पवन यादव, बीआरसी लखनादौन




