शिवराज के "बेशर्म राज" का प्रमाण, जनता को खूब "शराब" पिलाने के निर्देश, देखें......

शिवराज के "बेशर्म राज" का प्रमाण, जनता को खूब "शराब" पिलाने के निर्देश, देखें......

भोपाल/खाईद जौहर : मध्यप्रदेश में एक बार फिर शराब को लेकर सियासत का दौर शुरू हो गया है। दरअसल, वाणिज्यिक कर विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी शराब की खपत बढ़ाने को लेकर आज यानी मंगलवार को जिलों के आबकारी अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगी। इस संबंध में विभाग के उप सचिव आरपी श्रीवास्तव ने जिला आबकारी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। 

वहीं, अब इस आदेश को लेकर मप्र कांग्रेस ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है।

इस आदेश को कांग्रेस ने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए करते हुए लिखा की - शिवराज के बेशर्म राज का प्रमाण, जनता को खूब शराब पिलाने के निर्देश; मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने जनता को अधिक से अधिक दारू पिलाने के लिये वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से बैठक बुलाई है। शिवराज जी, आपने राक्षसराज की पुष्टि कर दी।“शिवराज से शर्मसार और लज्जित मध्यप्रदेश”

 

 

कांग्रेस ने कहा है कि इस निर्देश से स्पष्ट होता है कि सरकार की मंशा शराब बंदी नहीं, बल्कि इसकी खपत बढ़ाने में है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार का शराब प्रेम उजागर हो गया है।

हालांकि, इस आदेश को लेकर आबकारी आयुक्त राजीव दबे ने इसे लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिलों के अफसरों के साथ शराब की बिक्री के हिसाब से राजस्व वसूली होने को लेकर बात होगी। यह रूटीन समीक्षा बैठक है, जो हर 15 दिन में होती है। इसका तात्पर्य शराब की खपत बढ़ाने से नहीं है।

मालूम हो कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती भी शराब से राजस्व बढ़ाने को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने मार्च के महीने में सोशल मीडिया पर लिखा था- थोड़े से राजस्व के लालच और माफिया का दबाव शराब बंदी नहीं होने देता। इसके अलावा वो शराब को लट्ठ मारकर बंद कराने की बात भी कह चुकी हैं।  

इधर, कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने आरोप लगाया है कि सरकार स्तर पर शराब डिस्टलरियों के मालिकों को फायदा पहुंचाने का भी प्रयास हो रहा है। नियमानुसार आबकारी विभाग का कार्य वित्तीय वर्ष में हुए शराब ठेकों के तयशुदा राजस्व को वसूल करना व आबकारी अपराधों पर रोकथाम का होता है ना कि मदिरापान के लिए लोगों को प्रेरित करने का।