दिन महीने साल सब गुज़र जाएंगे, न जाने अतिथिविद्वानों के अच्छे दिन कब आएंगे…??

दिन महीने साल सब गुज़र जाएंगे, न जाने अतिथिविद्वानों के अच्छे दिन कब आएंगे…??

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव :- मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार को आए लगभग 1 साल होने को है.. पर अतिथिविद्वानों से जुड़े मुद्दे पर इस सरकार ने मौन साध रखी है. जब सत्ता में कमलनाथ की सरकार थी तो अतिथिविद्वानो को सेवा से बाहर किया गया था उस दौरान शिवराज ने अतिथिविद्वानो के धरना स्थल पर जाकर उनसे वादा किया था कि जब सत्ता में उनकी सरकार आएगी तो सबसे पहला काम अतिथिविद्वानो का नियमितीकरण होगा.. मार्च में सत्ता पलट हुआ.  सिंधिया अपने विधायकों के साथ बीजेपी में आए.. शिवराज ने उच्च कुर्सी संभाली पर अतिथिविद्वानो का नियमितीकरण अभी तक नहीं हुआ. 
उनके सारे वादे धरे के धरे रह गए…

 हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल पर अतिथि विद्वानों ने उन्हें घेरा और उनसे जवाब मांगा कि उनका नियमितीकरण कब कराया जाएगा. बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि अगर अधिक विद्वानों का नियमितीकरण नहीं होता है तो वह उनके साथ सड़कों पर उतरेंगे. पर अतिथि विद्वानों के साथ सड़क पर करना तो दूर की बात सिंधिया अब अतिथि विद्वानों से जुड़े मुद्दे पर बात भी नहीं कर रहे हैं…

 

 अतिथिविद्वानों की क्या है मांगें :- 
दरअसल अतिथि शिक्षक और अतिथि विद्वान, मध्य प्रदेश के स्कूल और कॉलेजों में संविदा पर पढ़ाने वाले अध्यापक हैं. ये खुद को नियमित करने की मांग को लेकर काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में अतिथि शिक्षकों और अतिथि विद्वानों को नियमित करने का वादा किया था. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी को आधार बनाकर सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़ा. शिवराज सरकार बने 9 महीने से ज्यादा हो गए, लेकिन हजारों अतिथि शिक्षक और विद्वान अपने नियमितिकरण का अभी तक इंतजार कर रहे हैं.
 कमलनाथ की शोषणकारी नीतियों की वजह से यह सेवा से बाहर हो गए. तब शिवराज ने खूब वादे किए. पर अब अपने सारे वादे भूल गए.

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