मोदी सरकार में 216 किसान ‘‘सांसद’’ नही, बल्कि धन्ना सेठ ‘‘सांसद’’ हैं ?

मोदी सरकार में 216 किसान ‘‘सांसद’’ नही, बल्कि धन्ना सेठ ‘‘सांसद’’ हैं ?

नई दिल्ली/ राजकमल पांडे। मोदी की कैबिनेट में अभी 543 सीटें है। जिसमे से पांच खाली हैं, 538 सांसदों में से 216 ने सरकारी दस्तावेजों में खुद को किसान बता रखा है। लेकिन अगर हम इनकी तनख्वाह पर नज़र डालें देश मे चल रहे भेद-भाव की एक झलक को हम साफ देख पाएंगे। देश का किसान महीने में औसतन 8,931 रु. कमाता हैं। यह आंकड़े सरकार के ही नाबार्ड के दस्तावेज में लिखे हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अगर हम सांसदों की तनख्वाह पर नजर डाले तो यह आंकड़े चौंकाने वाले होंगे। किसान सांसदों की तनख्वाह आम किसान के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। सांसदों को सारी सुविधाओं के बाद महीने की 2.30 लाख रुपए सैलरी मिलती है।

अभी किसान आंदोलन और कोरोना के चलते एक तरफ जहां किसान अपनी रोज़ी रोटी के लिए सड़कों पर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहा है वही दूसरी और किसान सांसदों को कट पिट कर भी 1.73 लाख रुपए मिलते हैं।  

अब बड़ा सवाल यह है कि किसानो के साथ यह भेदभाव क्यों किया जाता है, जबकि वहीं किसान सांसदों को लाखों में तनख्वाह मिल रहे हैं। फिर क्यों आम किसानों की तनख्वाह कुछ हज़ारों तक ही सीमित है? सांसद तो अपनी तनख्वाह से राज कर रहे हैं मगर वहीं किसानों को अपने हक के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। किसान दो वक्त कि रोटी के लिए कभी खेतो मे मजदूरी करता है, तो कभी सरकारों के द्वारा मिले वाली योजनाओ पर निर्भर रहते हैं पर शासकीय योजना भी महज कागजी जंगल में फैलाव बस का काम करता है।

नेता हर पंचवर्षी में यह वादा करके कुर्सी अर्जित कर लेते हैं कि ‘‘हमारी सरकार आई तो, हम किसानो का भला करेंगे।’’ पर होता हमेशा उल्टा ही है नेता अपना घर भरने मे लग जाते हैं और किसानो की हालात दिन दिन और दयनीय होती जाती है। आज देश के किसानो कि हालात यह है कि पिछले 100 दिन से

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