
जबलपुर:- सरकार की घोषणा के बाद भी सरकारी कार्यालयों के बाबू लोगों के काम में तरह-तरह से रोड़ा अटकाते रहते हैं कभी किसी दस्तावेज की कमी बताई जाती है तो कभी लापरवाही करते हुये पूरी फाइल ही गुमा दी जाती है ऐसा ही एक मामला मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत सागर रीजन में सामने आया है, जहां कोरोना संकट के समय ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करने वाले सागर ओएंडएम वृत्त में पदस्थ लाइन परिचारक लक्ष्मी नारायण नामदेव स्वयं कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए जिसके बाद उन्हें 8 अप्रैल को उपचार के लिए शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन 10 दिन चले उपचार के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका।
जिसके बाद उन पर आश्रित उनके पुत्र विनय कुमार नामदेव ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन किया.जिसके आधार पर सागर कलेक्टर ने 13 जुलाई को आवेदक विनय कुमार नामदेव को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र घोषित कर योजना का लाभ दिये जाने के निर्देश जारी किये थे.लेकिन विद्युत विभाग के द्वारा 4 महीने बीतने के बाद भी मृतक लाइन परिचारक के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान नहीं की गई। वहीँ परिजनों ने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर भी की है, इसके बावजूद उनके प्रकरण का निराकरण नहीं किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नौकरी करते हुये कोरोना संक्रमण से मृत होने वाले सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का ऐलान किया था लेकिन विधुत कर्मचारि के साथ हुए इस मामले में साफ़ देखा जा सकता है कि उसे अनुकंपा देने पर सरकार के ही विधुत संस्था पीछे हट रही है।