
मध्यप्रदेश/भोपाल – शुक्रवार को प्रदेश में एक्टिव केस 59 हजार 183 हो गए, जो गुरुवार को 55 हजार 694 थे। यदि रफ्तार ऐसी ही रही तो 30 अप्रैल तक सरकारी अनुमान के एक्टिव केस एक लाख 85 से भी 10 से 20 हजार ज्यादा होंगे। तब 651 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी। यदि दूसरे राज्यों से ऑक्सीजन लाते हैं तो इसे लाने के लिए 250 टैंकर चाहिए। हैरानी की बात है कि अभी 300 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन टैंकर सिर्फ 61 हैं। 50 सरकारी, 11 किराए के। जबकि जरूरत 120 से 130 टैंकरों की हैं।
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 285 टन ऑक्सीजन की स्टोरेज क्षमता है। दूसरे राज्यों से आने वाले टैंकरों को यहां खाली किया जा सकता है। निजी अस्पतालों में 100 से 150 टन की कैपिसिटी है। बता दें कि ऑक्सीजन बेड वाले एक कोरोना मरीज को 10 लीटर प्रति मिनट सप्लाई चाहिए। जबकि आईसीयू-एचडीयू बेड वाले गंभीर मरीज को 25 लीटर प्रतिमिनट ऑक्सीजन चाहिए।
इसी बीच सरकार का दावा है कि शुक्रवार को 336 टन ऑक्सीजन की व्यवस्था हो गई। यह 20 अप्रैल को 445 टन, 25 अप्रैल को 565 टन हो जाएगी। बात करे भोपाल की तो यहां 75 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति हो गई हैं। भेल रोजाना दो टन ऑक्सीजन दे रहा हैं। वहीं, इंदौर में भी 7 टैंकर ऑक्सीजन भेजने की तैयार की गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार शनिवार-रविवार तक ये 7 टैंकर इंदौर पहुंचेंगे। इसे कलेक्टर मनीष सिंह देख रहे हैं।