
मध्यप्रदेश/दमोह : मुख्यमंत्री शिवराज की महत्वपूर्ण ‘संबल योजना’ का मजाक बनाया जा रहा है, जिसका खुलासा दमोह ज़िले में हुआ हैं। बता दे कि ये वोही योजना है जिसे साल 2018 में शुरू किया गया था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस योजना पर रोक लगा दी थी, इसके बाद पिछले साल सितंबर में बीजेपी ने इसे फिर से एक्टिव किया। जिसका अब मज़ाक बनाया जा रहा हैं।
बताया जा रहा है कि बुधवार को संबल योजना के कार्ड हितग्राहियों के पास न मिलकर नदी में मिले। मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव का विजय गौड़ नहाने के लिए नदी में उतरा। उसे नदी में संबल योजना के करीब 32 कार्ड मिले। ये संबल कार्ड 2018 में बनाए गए थे। विजय गौड़ ने सभी कार्डों को इकट्ठा किया और लोगों को दिखाए। विजय गौड़ ने बताया कि मैं जैसे ही नहाने नदी में उतरा तो किनारे पर मैंने कुछ कार्ड देखे, जब मैंने उनको गौर से देखा तो अचरज में पड़ गया। मेरे हाथ में संबल कार्ड थे। ये कार्ड हमारे श्रमिकों के लिए बहुत जरूरी हैं।
जानकारी के अनुसार दमोह जिले में ग्राम पंचायत खुद ही हितग्राहियों को संबल योजना के लाभ से वंचित रख रही हैं। जिले के जबेरा जनपद पंचायत अंतर्गत पर परासई ग्राम पंचायत में श्रम विभाग द्वारा जारी संबल कार्ड हितग्राहियों को न देकर गांव से लगी हुई नदी में फेंक दिए गए। इस मामले पर ग्रामीण पवन अहिरवार ने कहा कि हमारे द्वारा ग्राम पंचायत से संबल कार्ड मांगे गए थे। लेकिन पंचायतकर्मियों का कहना है कि उनके कार्ड नहीं बने। जबकि, मेरी मां गौरा बाई अहिरवार का संबल कार्ड यहां नदी में पड़ा हुआ मिला।
इधर, इस खबर के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया, अधिकारी अब इस मसले की जांच कराने की बात कह रहे हैं। वहीं, दमोह जिले से मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामला है, इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।