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भोपाल डेस्क (गौतम कुमार)। कोरोना वायरस ने इस समय पूरे विश्व में उत्पात मचा रखा है। चीन के वुहान से उपजे इस वायरस को जहां एक तरफ चीन द्वारा तैयार किया गया एक जैविक हथियार बताया जा रहा है। वहीं कुछ लोग इसके पीछे अमेरिका का हाथ बता रहे हैं। हालांकि चीन द्वारा लगातार इस बात से इनकार किया जा रहा है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस वायरस के लिए चीन को जिम्मेदार बताते हुए कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस के नाम से पुकार रहे हैं। वहीं चीन, रूस, अरब, सीरिया जैसे देशों द्वारा इस वायरस के पीछे अमेरिका (US) का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। वहीं इस मसले पर अमेरिका और इजरायल का कहना है कि कोरोना वायरस चीन की लैब में तैयार किया गया एक जैविक हथियार है।
बता दें कि चीन के जिस वुहान शहर से यह वायरस फैलने की बात कही जा रही है। उसी वुहान शहर में चीन की इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी नेशनल बायोसेफ्टी लैब स्थित है। ये लैब हुनान सी-फूड मार्केट से मात्र 32 किलो मीटर दूर स्थित है, जिस मार्केट से इस वायरस के फैलने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसी लैब में इबोला, निपाह, सॉर्स और दूसरे घातक वायरसों पर रिसर्च किया जाता है। वहीं इस लैब के वैज्ञानिकों ने माइक्रोस्कोप में एक अजीब सा वायरस देखा था, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया हो। इस वायरस के जेनेटिक जेनेटिक सिक्वेंस को गौर से देखने पर पता चल रहा था कि ये चमगादड़ में मौजूद वायरस का करीबी हो सकता है। अब यह सारी बातें सामने आने के बाद से लोग इस बात का अनुमान जाता रहे हैं कि कोरोना वायरस इसी लैब से लीक हुआ। इस मसले पर इजराइल का कहना है कि कोरोना का संक्रमण वुहान से शुरू होना कोई इत्तेफाक नहीं है।
वहीं अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे दावे के उलट चीन, रूस जैसे देश दावा कर रहे हैं कि कोरोना वायरस अमेरिका के ट्रेड वॉर का हिस्सा है। अमेरिका ने पहले भी इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया है। इस मसले पर रूस की तरफ से इस बात का दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस अमेरिका का एक जैविक हथियार है, जिसे उसने चीन की अर्थव्यवस्था चौपट करने के लिए इस्तेमाल किया है। बता दें कि 1980 के शीत युद्ध के दौर में रूस ने HIV के लिए भी अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीन के खिलाफ ट्रेड वॉर में अमेरिका ने कोरोना वायरस का इस्तेमाल किया है? इसी प्रकार सीरिया का आरोप है कि कोरोना वायरस का इस्तेमाल अमेरिका ने चीन के खिलाफ उसकी अर्थव्यवस्था खत्म करने के लिए किया है। हालांकि, वुहान स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की प्रमुख वैज्ञानिक और निदेशक शी झेंगली ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को यह कह चुकी हैं कि उनके लैब से कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं फैला है।