
बीजिंग – : कोरोना(Corona) संकट के मसले पर दुनिया के कई देशों के निशाने पर आया चीन अब झुकता हुआ नजर आ रहा है। समाचार एजेंसी एएफपी(AFP) की रिपोर्ट के हिसाब से , वह अब इस महामारी की उत्पत्ति की जांच के लिए तैयार हो गया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने संवाददाताओं से यह कहा कि चीन का दरवाजा कोरोना के पैदा होने संबंधी अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए खुला है लेकिन ऐसी जांच राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त (free of political interference) होनी चाहिए।
बढ़ रही अमेरिका के प्रति तकलीफ
इस दौरान चीन की तकलीफ अमेरिका के प्रति कम होती नजर नहीं आई। चीनी विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हमलों पर कहा कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन को बदनाम करने और अफवाह फैलाने की अमेरिकी कोशिशें विफल हुई हैं। और यह भी कहा कि कोरोना के मसले पर चीन के खिलाफ चलाए गए किसी भी मुकदमे का कोई भी कानूनी नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ तैयार
चीनी के विदेश मंत्री ने देश के वार्षिक संसद सत्र के मौके पर बात करते हुए कहा कि चीन वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ काम करने के लिए तैयार है। चीन मानता है कि ऐसी जांच पेशेवर, निष्पक्ष और रचनात्मक होना चाहिए। आगे कहा कि यहां निष्पक्षता का अर्थ है कि जांच प्रक्रिया किसी भी राजनीतिक दखलंदाजी से परे भी होनी चाहिए।
दुष्प्रचार अभियान चला रहा है चीन
ब्रिटेन के एक थिंक टैंक ने कोविड-19(Covid) पर चीन के दुष्प्रचार अभियान और दुनियाभर में इसके प्रभाव को कम करने के लिए एक वेबिनार का आयोजन किया। इसमें रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के एक शोधकर्ता वीरले नौवेन्स ने कहा कि चीन महामारी को लेकर नकली कथा का निर्माण कर रहा है और स्पष्ट रूप से दूसरों पर दोष लगाने की कोशिश की जा रही है। वीरले ने कहा, विभिन्न थिंक टैंकों के अध्ययनों को देखा है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चीनी दुष्प्रचार अभियानों में तेजी आई है। यूरोपीय संघ मानता है कि कोविड चीनी स्रोतों से आया है।
आमने आए यूएस और चीन
कोरोना वायरस फैलने के बाद से चीन और अमेरिका के संबंधों में कड़वाहट आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग का प्रशासन कई बार एक दूसरे के आमने-सामने आ चुका है। अमेरिका खासकर चीन पर महामारी के बारे में छिपाने और पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप हमेसा लगाता रहता है। दुनिया की दोनों शीर्ष आर्थिक शक्तियां हांगकांग, व्यापार और ताइवान को अमेरिकी समर्थन के मामले पर भी आमने-सामने आ चुकी हैं।
WHO में भी पास हो गया है प्रस्ताव
यह दबाव का ही नतीजा है कि बीते दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी (WHO) के सदस्य देश इस आशय की जांच के लिए राजी हो गए कि कोरोना वायरस से उत्पन महामारी से निपटने को लेकर संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी की भूमिका कैसी रही। यही नहीं इस बारे में यूरोपीय यूनियन की ओर से रखा गया प्रस्ताव भी सभी की सहमति से पास हो गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि इस बात की जांच होगी कि डब्ल्यूएचओ(WHO) ने क्या कदम उठाए और उनका समय क्या ठीक था?