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रीवा :- लॉक डाउन में बदली फिजा, 70 फीसदी घटा प्रदूषण, जानिए इस रिपोर्ट में 

लॉक डाउन में बदली फिजा, 70 फीसदी घटा प्रदूषण, जानिए इस रिपोर्ट में 

रीवा से गौरव सिंह की रिपोर्ट:-कोविड 19 के कारण 22 मार्च से लॉकडाउन से अर्थव्यस्था की व विकास की रफ्तार जहां धीमी पड़ी है। वहीं इसक उल्ट वातावरण के प्रदूषण में 70 फीसदी की कमी आई है। इसका असर तापमान में दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग की माने में दो दशक बाद मई में पारा सामान्य से कम है। जबकि गर्मी के वैसाख का महीना समाप्त होने को है। अब भी पार 33 से 35 के बीच अटका हुआ है। साथ ही वातावरण में सल्फर डाइ आक्साइड व नाइट्रोजन आक्साइड की मात्रा बहुत कम हो गई है।
बताया जा रहा है लॉक डाउन के कारण वाहन बंद है। इससे कार्बन मोना आक्साइड की मात्रा घटी है साथ ही औद्योगिक इंकाइया बंद होने से निकलने वाले धुएं के कारण वातावरण में सल्फर डाइ आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड की मात्रा घटी है। साथ ही एसी का उपयोग भी कम हो रहा है। इसका असर में तापमान के पारा पर पड़ा है। मौसम विभाग के विशेषज्ञ बताते है कि इससे पारा का तापमान में लगभग दो से तीन डिग्री का अंतर है। यहीं कारण है विंध्य में अभी पारा सामान्य 35 डिग्री से कम है। जबकि गर्मियों को वैसाख का दिन समाप्त होने को है। 8 मई से ज्येष्ठ के दिन प्रांरभ हो जाएंगे। बताया जा रहा है इससे पहले मई में इन दिनों पारा 40 से 45 डिग्री के बीच पहुंच जाता है। हालाकि इस देर तक बारिश और उसके बाद लगातार सिस्टम बनने से बीच -बीच में हो रही बारिश भी है। लेकिन 45 दिन के लॉक डाउन में हवा की फीजा बदल गई है।
55 से 60 माइक्रोग्राम घन मीटर पहुंची पीएम टेन की मात्रा
शहर में सबसे अधिक पीएम टेन खतरनाक स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी और मार्च महीनो में इसका आकड़ा 500 माइक्रोग्राम घन मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन लॉक डाउन के बाद पीएम टेन की मात्रा में रिकार्ड कमी आई है। वर्तमान में पीएम टेन की मात्रा हवा में 55 से 60 माइक्रोग्राम तक पड़ी है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ा है। लोगों के स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है।
फैक्ट फाइल गैस का प्रति माइक्रोग्राम घन मीटर में 
गैस का नाम लॉकडाउन के पहले लॉकडाउन के बाद
सल्फर डाइ आक्साइड 20 से 22 7 से 8 
नाइट्रोजन आक्साइड 14 से 15 4 से 5
कार्बन मोनो आक्साइड 300 से 400 55 से 60
70 फीसदी कम हुआ प्रदूषण
  क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ आर एस परिहार ने कहा कि लॉकडाउन के कारण वाहन एवं औद्योगिक इकाइयां बंद होने से वातावरण में प्रदूषण का स्तर बहुत कम हुआ है। 70 फीसदी की प्रदूषण कम हुआ है। यहां पहले भी सल्फर, डाइ आक्ससाइड , नाइट्रोजन आक्साइड व कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा क्षमता से बहुत कम थी। लेकिन लॉकडाउन के हवा में इनकी मात्रा तेजी से घटी है।

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