नागरिकता संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती – महुआ मोइत्रा

 

पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियां  बटोर  रहा नागरिकता संशोधन कानून एक बार फिर चर्चा में है। इसका कारण सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को  टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दी गयी चुनौती है।  दरअसल, नागरिकता संशोधन बिल के राज्य सभा में पास होने के बाद, गुरूवार देर रात राष्ट्रपति द्वारा भी इसको मंज़ूरी दे दी गयी है।  जिसके चलते शुक्रवार सुबह टीएमसी की महिला सांसद मोइत्रा ने इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।  बता दें की याचिका में इस विधेयक पर धर्म के नाम पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। साथ ही साथ उसमे यह भी लिखा गया है की “शरणार्थियों को नागरिकता दिये जाने के बारे में कोई शिकायत नहीं है लेकिन याचिकाकर्ता की शिकायत धर्म के आधार पर भेदभाव को लेकर  है।  इस कानून से बाहर रखे गए मुस्लिम समुदाय के लोगों को विदेशी नागरिक न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। क्योंकि वे हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और ईसाई नहीं बल्कि मुस्लिम हैं. यह स्पष्ट रूप से भेदभाव है और नागरिकता संशोधन कानून असंवैधानिक ही नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र के मूलभूत सिद्धांत के भी खिलाफ है। “
इस मामले में मोइत्रा के वकील ने  चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की पीठ के समक्ष याचिका को जल्दी से जल्दी सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। 

क्या है पूरा मामला ?

नागरिकता संशोधन कानून बिल के पास हो जाने और राष्ट्रपति  की हामी मिलने के बाद देश भर में प्रदर्शन तीव्र गति से बढ़ गया है।  दरअसल इस बिल के अनुसार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले हिन्दू, बौद्ध, सिख, पारसी, जैन, ईसाई समुदाय के अवैध शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान कर दी जाएगी। हालाँकि इस कानून से कुछ पूर्वोत्तरी राज्यों को इससे बाहर भीं रखा गया है। गौरतलब है की इस विधेयक में मुस्लिम समुदाय को इसमें शामिल न करने पर पूरे देश में जगह जगह प्रदर्शन किया जा रहा है।  
 

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