सिहोरा : मिले 7 पॉजिटिव, एरिया तक नहीं हुआ सील, प्रशासन ने सिर्फ़ 50 मीटर में की बैरीकेटिंग देखे video

सिहोरा : मिले 7 पॉजिटिव, एरिया तक नहीं हुआ सील, प्रशासन ने सिर्फ़ 50 मीटर में की बैरीकेटिंग 

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कोरोना संक्रमण को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही, संक्रमित वार्ड में पुलिस औऱ प्रशासन का एक भी नुमाइंदा तैनात नहीं

द लोकनीति डेस्क 
जबलपुर (सिहोरा)

गृह मंत्रालय (Home ministry),जहाँ कोरोनो को लेकर दिन -प्रतिदिन सख्त एडवाइजरी कर रहा हैं लेकिन मध्यप्रदेश की जबलपुर ज़िले की सिहोरा तहसील में इसका खुलेआम उल्लंघन देखने को मिल रहा है। मालूम रहें कि शनिवार को सिहोरा के वार्ड नम्बर 1 में एक ही परिवार के 7 लोगों की रिपोर्ट कोरोनो पॉजिटिव आई थी।लेकिन शासन औऱ प्रशासन ने सम्बंधित वार्ड की सिर्फ़ 30 मीटर सड़क को ब्लॉक किया हैं ,जबकि गृह मंत्रालय की  कोरोनावायरस को लेकर जारी गाइडलाइन के मुताबिक किसी क्षेत्र में एक या एक से अधिक कोविड-19 पॉजिटिव मिलने पर पूरे एरिया को सील कर दिया जाता हैं लेकिन यहाँ तो मामला 
वाक़ई बहुत बड़ा यानि 7 पॉजिटिव लोगों का हैं।

बैरिकेटिंग एरिया पुलिस औऱ प्रशासन नदारद..
मिले तो सिर्फ़ ये…(ग्राउंड जीरो)


जब द लोकनीति वार्ड नम्बर 1 में पहुंचा
तो हमनें पाया कि जबलपुर पुलिस के स्टॉपर उस संक्रमित परिवार के आसपास के तीन घरों से गुज़री सड़क पर रखें थे ,स्टॉपर के ऊपर कोरोनो(covid-19) प्रभावित क्षेत्र(affected area) प्रवेश निषेध का एक छोटा सा बैनर लगा था। वहाँ पर ना तो किसी पुलिस कर्मी की तैनाती थी, न ही कोई प्रशासनिक अमले की ।
वही दूसरी औऱ वार्ड की पक्की सड़क जो संक्रमित क्षेत्र को जोड़ती थी वहां से लोगों की आवाजाही बेरोक-टोक जारी थी।पुलिस औऱ प्रशासनिक की गैरमौजूदगी में बच्चे-बूढ़े औऱ महिलाएं घूमते -फ़िरते नज़र आये ।

प्रशासन की लापरवाही पड़ सकती हैं शहर पर भारी….???
सिहोरा में एकसाथ सात लोगों (एक ही परिवार) के कोरोनो संक्रमित मिलने का संभवता यह पहला मामला हैं, जो कोरोनो बम(Corona blast) जैसा ही है, लेकिन इतने गंभीर मामले को प्रशासन आख़िर क्यों हल्के में ले रहा हैं। संक्रमित क्षेत्र (वार्ड)को कोविड19 संक्रिमतों को कोविड-19 सेंटर जबलपुर भेजे 6 घण्टो से ज्यादा का समय हो गया हैं लेकिन अभी तक पूरे एरिया को सील नहीं किया गया हैं औऱ ना ही व्यवस्थित तरीके से बैरिकेटिंग कराई गई, पुलिस औऱ प्रशासन की यह बड़ी लापरवाही शहर वासियों पर भारी पड़ सकती है ।
जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया :कोरोना काल में लोगों में एक सामाजिक समझ भी आई कि जब जान की पड़ती हैं तो कोई मदद करने नहीं आता। समाज में आज भी ऐसे कई वर्ग हैं जो हमेशा से उपेक्षित होकर  गन्दी  राजनीति के शिकार होते रहे हैं ,लेकिन जनता को भी इतनी समझ आ रही हैं कि हमारे नेता चाहें वो किसी पार्टी के हो आज जब हमें उनकी जरूरत हैं तो वे लापता रहते हैं, उनकी मदद के लिए कोई नहीं आ रहा ,परन्तु जब चुनाव नजदीक आते हैं तो यहीं जनप्रतिनिधि औऱ नेता जनता की जी हजूरी करते नजऱ आते हैं।

द लोकनीति की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट

यहाँ देखे पूरा video

https://www.facebook.com/TheLoknitiSihora/videos/651490655491396/

वैसा ही यह उपेक्षित वर्ग वाला यह वार्ड  आज मदद की पुकार कर रहा है, क्योंकि कोई भी वहां उनकी देखरेख के लिए नहीं पहुँचा …
सभी नेता लोग जनता की मदद से अब बहुत दूर चले गए हैं। यह दूरी शायद अब चुनाव आने पर ही दूर हो सकती है। फिलहाल हम और आप अपना ध्यान रखें सतर्क और सावधान रहें, तभी हम खुद की और अपने सिहोरा को covid -19 के संक्रमण से बचा सकते हैं।

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