
भोपाल, शहडोल: नही रूक रहा जिला चिकित्सालय में बच्चों के मौत का सिलसिला ! बीती रात 2 और बच्चों की हुई मौत !! लापरवाह डाॅक्टरों पर प्रदेश के मुखिया मेहरबान ?
शहडोल जिला चिकित्सालय मे बीती रात 2 और मासूम बच्चों की हुई मौत से क्या अब दोषियो को पकडने हेतु पुन: बनेगी जांच टीम, यहां फिर शिवराज के खोखले फटकार से ठंडा होगा मामला ?
भोपाल/राजकमल पांडे। जैसा की सभी को मालूम है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी लचर है और प्रदेश सरकार के गैरजिम्मेदाराना रवैया से स्थिति यहां तक आ गई है कि सरकारी अस्पतालों में जो इलाज कराने जाते है, उनमें कम ही ऐसे हैं जिन्हें जीवन मिल पाता हो। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान कहते है कि हम हर व्यवस्था को बेहतर करेंगे, पर उनके बेहतर करने तक शायद प्रदेश की जनता का दम ही न निकल जाए। मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक करने के लिए घोषणा तो कर रही है अपितु बकौल भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कि 1 रुपए अगर जनता को भेजा जाए तो पहुंचते-पहुंचते वह कैसे 5 पैसे में तब्दील हो जाते हैं, सभी को मालूम है। सरकार की ढकोसली स्वास्थ्य व्यवस्था किस स्तर तक आ पहुंचा है अगर इसका उदाहरण आपको देखना हो तो मध्यप्रदेश के शहडोल जिला चिकित्सालय में जाकर देख सकते हैं। पिछले 8 से 9 दिनों के भीतर 10 मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके इस घनघोर लापरवाही में कोई दोषी साबित नहीं हो रहा है। अभी फिर बीती रात को 2 और मासूम बच्चों की मौत हो गई है, और शायद इस पर भी कोई दोशी साबित नही होगा. पर एक बात तो है. शहडोल जिला चिकित्सालय में जिस तरह मासूम बच्चों के जीवन से नौसिखिया डाॅक्टर खेल रहे उससे जाहिर होता है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जनता को अपने ढकोसले आश्वासन में किस तरह बांध रखा है। जिन 2 और मासूम बच्चों की मौत कल रात हुई शायद इससे प्रदेश सरकार की आंख खुले और दोषी डाॅक्टरों सहित जांच टीम के ऊपर भी एक जांच बैठाकर सूक्ष्म रूप से जांच करवाए कि आखिर कौन, कहां और क्यों लापरवाही कर रहा है. सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.
जांच टीम ने भी की लापरवाही
बीती रात 2 और मासूम बच्चों की मौत ने जांच टीम के ऊपर सवालिया निषान लगाता है. मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फटकार के बाद जांच कमेटी बनाई गई थी, जोकि 8 बच्चों के मौत की वजह पता करने के लिए बनाई गई थी। अपितु जांच टीम ने डाॅक्टरों को क्लीन चिट देकर यह साबित कर दिया कि भ्रष्टाचार किस चरम में है।
- यह है पूर्व के मामले और आरोप
मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पूरा शासकीय कोष खाली कर दिया और व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर बडी-बडी ढींगे हांकते है. पर जब इन सरकारों के योजना और व्यवस्था की जमीनी हकीकत खांघाला जाए तो ज्ञात होता है कि सरकारी फाईलों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने के नाम पर कितना विषाल जंगल का फैलाव है। इतना ही नही जब भी सरकारी अस्पतालों में किसी मरीज या शिशुओं की मौत होती है. तो यही कहके बात टाल दिया जाता है कि हमने बचाने का भरसक प्रयास किया पर बचा नही पाए. और यही हुआ शहडोल जिला चिकित्सालय में भी जहां 6 दिनों के भीतर 8 मासूम बच्चों की मौत हो गई। जिस पर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए डाॅक्टरों को फटकार लगाया था. जिसके बाद 8 मासूम बच्चों के मौत की वजह जानने के लिए भोपाल से जांच टीम भेजी गई थी। जिसमें जांच अधिकारी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज जबलपुर के सीनियर डाॅक्टर पवन घनघोरिया और असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अखिलेन्द्र सिंह परिहार जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य आयुक्त डाॅ. मोयल, को सौपी है। डाॅ. गोयल ने वह जांच रिपोर्ट नेशनल हेल्थ मिशन की एमडी छवि भारद्वाज को यह कहके सुपुर्द कर क्लीन चिट दिया है कि शहडोल के डाॅक्टरों ने बच्चों को बचाने हेतु प्रारंभिक उपचार अच्छे से किया था। डाॅ. गोयल ने कहा कि जिन बच्चों की मौत हुई उन्हें जबलपुर रैफर किया गया था। लेकिन उनके परिजनों ने ले जाने से मना कर दिया।
अब सवाल यह उठता है कि शहडोल जिला चिकित्सालय में बेहतर स्वास्थ्य के नाम पर राज्य से लेकर केन्द्र सरकार के कोष खाली हो रहे हैं फिर 8 मासूम बच्चों की मौत को प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान कैसे पचा पाएंगे।
शहडोल अस्पताल में 7 से 8 शिशु रोग चिकित्सकों का पद है खाली
शहडोल जिला चिकित्सालय मे औसतन हर दिन एक बच्चे की मौत हुई है. नवम्बर में एसएनसीयू में 190 बच्चे भर्ती हुए. जिसमें से 24 की मौत हुई है। इसी तरह पीआईसीयू में 7 बच्चों की मौत हुई. 8 बच्चों की मौत हाल ही में 6 दिनों के भीतर हुआ। वहीं जिला चिकित्सालय में शिशु रोग चिकित्सकों के 7 से 8 पद खाली हैं। प्रदेश के मुखिया शिवराज ने कहा था कि जो दोषी पाया जाएगा उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में जांच टीम डाॅ. पवन घनघोरिया और असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. अखिलेन्द्र सिंह परिहार की जांच रिपोर्ट संदेह पैदा करती है कि जब 7 से 8 शिशु रोग चिकित्सकों का पद शहडोल जिला चिकित्सालय में रिक्त है, तो 8 मृतक बच्चों का प्रारंभिक उपचार बेहतर कैसे संभव हुआ होगा, 8 मृतक मासूमों का बेहतर इलाज हुआ होगा का दावा बेबुनियाद है। इससे साफ जाहिर होता है कि जांच टीम ने एक तरफा जांच रिपोर्ट बनाकर डाॅ. संजय गोयल को सुपुर्द कर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। इसमें अगर शहडोल जिला चिकित्सालय के डाॅक्टर दोषी नही हैं तो फिर क्या परिजनों पर दोष मडना कि हमने जबलपुर रैफर किया था परिजन ले जाने से मना कर दिए, कहां तक न्याय संगत है।
शिवराज के फटकार हैं खोखले, नहीं होते लापरवाह अधिकारी सीधे?
सीएमएचओ डाॅ. राजेश पांडे ने कहा कि एसएनसीयू और पीआईसीयू में 20 बेड हैं, जिसमें 14 लोगों की पोस्ट है। सिर्फ 6 ही काम कर रहें हैं. आठ पद रिक्त हैं. और अपना पल्ला बचाते हुए डाॅ. पांडे ने कहा कि जहां तक डाॅक्टरों का सवाल है तो मेडिकल काॅलेज के 2 असिस्टेंट प्रोफेसर और 4 रेजीडेंट डाॅक्टर सहयोग कर रहे हैं। डाॅ. पांडे के कथन से जाहिर होता है कि व्यवस्था देने के नाम पर खानापूर्ति करने हेतु मेडिकल काॅलेज के सहायक प्राध्यापक डाॅ. निषांत प्रभाकर को एसएनसीयू एवं पीआईसीयू का प्रभारी बना रखा है और इनके साथ मेडिकल काॅलेज के ही 4 सीनियर रेजीडेंट डाॅक्टर व एक कंसलटेंट डाॅक्टर को भी अटैच कर रखा है। जाहिरन प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की जनता को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने में फिस्डी साबित हो गए हैं। अब देखना यह है कि जो जांच रिपोर्ट प्रेषित की गई है उससे संतुष्ट होकर मामला ठंडे बस्ते में डालते हैं या फिर शहडोल जिला चिकित्सालय के डाॅक्टरों की लापरवाही के सहित जांच टीम के ऊपर भी एक और जांच बैठाते हैं या फिर 8 मासूम बच्चों के मौत का मामला भी कोई राजनीतिक तूल पकडेगा।