भोपाल : हमीदिया से चोरी नहीं हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन….बल्कि हुआ कुछ ऐसा! जानें क्या है सच…

मध्यप्रदेश/भोपाल – मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्‍पताल हमीदिया में रेमडेसिविर इंजेक्शन चोरी होने के मामले में अब जांच के दौरान कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हमीदिया अस्पताल में स्थित सेंट्रल ड्रग स्टोर से लेकर कोविड-19 सेंटर के बीच बड़ी धांधली उजागर हुई हैं।

इसी बीच अब इस पूरे मामले में सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी मिली हैं। जो जानकारी मिली है वह बताती है कि किस तरह से आम जनता के लिए आए हुए इंजेक्शनों की बंदरबांट की गई।

बताया जा रहा है जब इंजेक्शनों का बॉक्स हमीदिया अस्पताल पहुंचा तो वहां पर मौजूद स्टाफ के पास इस बात के लगातार दबाव आने लगे कि चुनिंदा लोगों को इंजेक्शन दे दिये जाएं। इन राजनीतिक और प्रशासनिक दबावों के चलते स्टाफ के लोगों को ऐसा करना भी पड़ा और कई ऐसे लोगों को एक साथ छह छह इंजेक्शन दे दिए गए, जो ना तो अस्पताल में भर्ती थे और ना ही जिनकी बहुत ज्यादा क्रिटिकल स्थिति थी।

अब सवाल यही है कि जब आम जनता के लिए और विशेषकर उस मरीज के लिए जो हमीदिया में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे जिनके लिए ये इंजेक्शन आए थे तो फिर आखिरकार इनकी बंदरबांट क्यों की गई? 

मालूम हो कि 16 अप्रैल के पहले से ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन की भारी किल्लत पूरे प्रदेश में देखने को मिल रही थी। लोग एक एक इंजेक्शन के लिए 25 से 50 हजार रू. तक देने को तैयार थे। बावजूद उसके इंजेक्शन मिल नहीं रहे थे। वहीं, अब ये मामला हाईप्रोफाइल हो चुका है इसलिए इस बात की उम्मीद कम ही है कि इस पूरे मामले से पर्दा उठ पाए।  

इस से पहले इस मामले में अभी तक 35 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। रेमडेसिविर इंजेक्शन चोरी के मामले में स्टोर के फार्मासिस्ट पर भी भी शक हैं। इसके अलावा पुलिस ने अस्पताल के अधीक्षक आईडी. चौरसिया को भी हिरासत में ले लिया हैं। मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच पुलिस ने उनसे चोरी के सिलसिले में पूछताछ की हैं। सूत्रों से पता चला है कि क्राइम ब्रांच ने डॉ. आरडी चौरसिया को थाने में बैठाकर रखा। उनसे 5 घंटे से भी ज्‍यादा समय तक पूछताछ की गई। 

चौरसिया से एडिशनल एसपी सहित कई पुलिस अधिकारियों ने सवाल-जवाब किया। बताया जा रहा है कि चौरसिया के खिलाफ क्राइम ब्रांच को सबूत मिले हैं। सूत्र बता रहे हैं कि क्राइम ब्रांच को इंजेक्शन का रिकॉर्ड नहीं मिला हैं। इस मामले में हमीदिया अस्पताल के स्टाफ की मिलीभगत भी उजागर हो रही हैं। 

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