भोपाल: 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लाॅक में 5 हजार से ऊपर स्कूल बंद करेगी सरकार ! करना क्या चाहते हैं प्रदेश के मुखिया शिवराज ?

भोपाल: 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लाॅक में 5 हजार से ऊपर स्कूल बंद करेगी सरकार ! करना क्या चाहते हैं प्रदेश के मुखिया शिवराज ?
द लोकनीति डेस्क
भोपाल/राजकमल पांडे।
शिक्षकों की भर्ती मामले को लेकर प्रदेश सरकार यह फैसला षिक्षा पर मुश्किले बैठाएगा या फिर सरकार का बोझ हल्का होगा. खर्चा बचाने और शिक्षकों की समस्या कम करने के नाम पर यह सरकार का जोखिम भरा फैसला कहा जा सकता है. क्योंकि 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लाॅक में 5 हजार स्कूल बंद करने का फैसला कोई हठखेल नहीं जिसे प्रदेश सरकार आनन-फानन बंद कर देगी. क्योंकि 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लाकों में संचालित होने वाले 5760 स्कूल बंद करना शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड करने जैसा है. प्रदेश सरकार कहती तो है कि इससे सरकार का बोझ हल्का होगा और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का भी समाधान हो जाएगा. स्कूल बंद करने का निर्देश स्कूल षिक्षा विभाग की तरफ से संबंधित जिलों को जारी भी कर दिए गए हैं. व साथ ही स्कूल बंद करने को लेकर एडवाजरी भी जारी कर दी गई है. जिसके विधिनुसार स्कूलों को बंद करने का काम किया जायेगा.
गौर तलब है कि प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद सियासत भी कर्मा गई है. जिसकी प्रतिक्रिया विपक्ष ने देते हुए कहा कि प्रदेष का 5 हजार से अधिक आदिवासी ब्लाॅकों के स्कूल बंद करने का फैसला आदिवासी विरोधी भी है. तो वहीं प्रदेश सरकार ने अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इन सभी आदिवासी ब्लाॅकों में अब तक 150 मीटर की परिधि में प्राइमरी, मिडिल और हाईस्कूल अलग-अलग संचालित किए जाते थे. जिसको लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि 150 मीटर की परिधि में अब केवल एक ही स्कूल संचालित किये जायेंगे. जहां कक्षा 1 से लेकर 12 वीं तक के क्लास एक ही स्कूल में संचालित किये जायेंगे. 
प्रदेश सरकार के तर्क
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे आर्थिक बोझ कम होगा व शिक्षकों की संख्या को लेकर उत्पन्न होने वाले संकट का भी समाधान हो जायेगा. 5 हजार से भी ऊपर के स्कूल बंद किये जाने के पीछे का प्रदेश सरकार का एक तर्क और है कि अधिकतर आदिवासी ब्लाॅंकों में कई स्कूल बहुत ग्रामीण क्षेत्रों में थे. जिनका संचालन सही ढंग का नहीं हो पा रहा था. व शिक्षकों को हर दिन आने जाने में परेषानियों का सामना करना पड़ता था. व छात्रों की भी संख्या कम ही होती थी इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है.
इस पर बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश सरकार ने इतनें वर्षाें से आदिवासी ब्लाॅको के रहवासियों को जागरूक करने के नाम पर जो लाखों-करोडों और अरबों रूपये बहाये क्या वह इस 5 हजार से भी ऊपर स्कूल बंद करने के फैसले पर दवा लगा देगा. जिन स्कूलों को बंद करने का फैसला सरकार ने लिया क्या वहां के स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर नहीं पडेगा यह विचारणीय मसला है जिस पर प्रदेश सरकार को एक बार मंथन जरूर करना चाहिए. 
स्कूल षिक्षा विभाग के 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लाॅक में संचालित होने वाले 10506 स्कूल हैं. जिसमें 5760 स्कूल सरकार बंद करने जा रही है. इसके बाद महज 4746 ही शेष रह जायेंगे.
अभी वर्तमान में शिक्षकों की भर्ती का मसला सरकार हल नहीं कर पा रही तो दूसरी 5 से भी ऊपर स्कूल बंद करने का फैसला शिक्षकों का राहत मात्र देने जैसा है कि अब कुछ समस्या का समाधान होगा पर अब भी अतिथि शिक्षकों व पात्रता अभ्यर्थियों की भर्ती के मामले पर प्रदेश सरकार ने अपना विचार स्पष्ट नहीं किया है. जिससे अब भी शिक्षक दरदर की ठोकरे खा रहे हैं.
 

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