भोपाल : एक महीने में चार गुनी हो गई संक्रमण की रफ़्तार पर सरकार की रफ्तार धीरे क्यों ?

भोपाल : एक महीने में चार गुनी हो गई संक्रमण की रफ़्तार पर सरकार की रफ्तार धीरे क्यों ?
- शिवराज सरकार खर्च बचाने पर ध्यान दे रही है टेस्टिंग बढ़ाने पर नहीं
भोपाल/ निकिता सिंह : कोरोना के दूसरे डोज ने लोगों को हिला कर रख दिया है कोरोना का दूसरा टेस्ट पहले से काफी खतरनाक बताया जा रहा है। इसके बावजूद भी शिवराज सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही शिवराज सरकार दिखावा तो करती है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। 1 महीने में चार गुना संक्रमण बढ़ने के बावजूद सरकार ने टेस्टिंग की संख्या बड़ाई नहीं है। बताया जा रहा है कि सरकार खर्च बढ़ाना नहीं चाहती इसलिए कोरोना की सीमित जांच हो रही हैं।
सूत्रों के अनुसार फरवरी में जब केस काम हुए तो जांच की संख्या 40 से 50 फीसदी घटा दी गई थी। कोरोना जनवरी में 4 गुना बढ़ गए इसके बावजूद जांच उतनी की उतनी ही है।
आपको बता दें कि 21 जनवरी तक जहां प्रदेश में रोज 24 हजार से ज्यादा जांचे हो रही थी। जिसके बाद घटकर 16 हजार 413 पर अटक गई है। जबकि कोरोना के मामले पहले से 4 गुनी बढ़ गए हैं । टेस्टिंग ना बढ़ाने पर केंद्र स्थल से भी सरकार पर काफी दवाब डाला। केंद्र सरकार के अनुसार कम टेस्ट होने के कारण शिवराज सरकार को ज्यादा से ज्यादा ( RTPCR ) जांच करने को कहा गया।
आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण बढ़ने का कारण सरकार की लापरवाही बताई जा रही है जनवरी अंत तक 25 से 26 हजार जांच हुई। 1 सप्ताह में 40% गिरावट देखी गई है। 15 फरवरी से प्रदेश में कोरोना तेजी से बढ़ रहा हैं। इसके बावजूद सरकार के संक्रमण रोकने को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखा रही हैं।
- आपको बता दें कि कोरोना की जो रिपोर्ट आ रही है :-
- उसे मौखिक बताया जा रहा है । रिपोर्ट तक की कोई कॉपी नहीं दी जा रही है।
- काॅन्टैक्ट ट्रैसिंग का काम लगभग बंद ही कर दिया हैं।
- कई लोग डर से जांच नहीं करवा रहे हैं जिससे लोगों की संख्या बढ़ रही है।
- सेकंड डोज के बाद हुई लापरवाही :-
कोरोना के दूसरे डोज के 24 दिन बाद से कोरोनावायरस लौट आया। कई लोगों ने तो दोनों डोज लगने के बावजूद कोरोना संक्रमित हो गए।

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