
मध्यप्रदेश/भोपाल – मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना बेकाबू होता जा रहा हैं। यहां आए दिन रिकॉर्ड तोड़ मामले सामने आ रहे हैं। हालात ये है कि अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत तो शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही अब रेमडेसिविर के इंजेक्शन के लिए भी हाहाकार मच रहा हैं। दुकान पर लिखा है 'रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टाॅक नहीं है, अस्पताल में संपर्क करें। भोपाल में कई जगहे हालात ये है कि एक इंजेक्शन के लिए लोग सुबह से ही लाइन में लग रहे हैं। लोग अपने किसी ना किसी रिश्तेदार को महामारी से बचाने के लिए घंटों धूप में तप रहा हैं। भीड़ इतनी कि धक्का-मुक्की की स्थिति बन रही हैं। बावजूद इसके इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं।
हालांकि, भोपाल में कलेक्टर अविनाश लवानिया ने जरूरतमंदों को इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए सप्लायरों को चिन्हित कर उनके नंबर जारी किए हैं। इसके लिए निरीक्षक भी बनाए गए हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि चार-पांच दिन चक्कर लगाने के बाद और मिन्नतों के बाद भी लोगों को इंजेक्शन नहीं मिल रहा हैं। जिसके कारण कोविड पीड़तों के परिजन आपा खोने लगे हैं।
बता दे कि शनिवार को दवा बाजार में ऐसा ही शख्स अपनी मां के लिए इंजेक्शन लेने पहुंचा। जब उसने सप्लायर से बात की, तो उन्होंने इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने का कहते हुए देने से मना कर दिया। वह बीते 5 दिन से इंजेक्शन के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें इंजेक्शन नहीं मिला रहा। ऐसे में उन्होंने फोन पर अधिकारियों से बात करते हुए गुस्सा जाहिर किया। साथ ही फ़ोन पर गाली गलौज भी की।
इधर, एक स्टॉकिस्ट ने बताया कि कई मरीजों के परिजनों ने 10 से 12 दिन पहले ही इंजेक्शन की एडवांस बुकिंग कर ली। पैसे भी दे दिए, लेकिन उन्हें अब तक सप्लाई नहीं मिली। हर दिन इंजेक्शन के लिए एक हजार से ज्यादा फोन आ रहे हैं।
गौरतलब है कि रेमडेसिविर इंजेक्शन फरवरी में आसानी से उपलब्ध था। मार्च के अंतिम हफ्ते और अप्रैल के पहले हफ्ते में ये आउट ऑफ स्टॉक हो गए। जिनके पास कुछ इंजेक्शन बचे भी हैं, तो वो दोगुनी कीमत वसूल रहे हैं।