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बड़वानी : उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति ने बड़वानी जिले के तीन मध्यस्थता केंद्र का किया ई – लोकार्प

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति ने बड़वानी जिले के तीन मध्यस्थता केंद्र का किया ई – लोकार्पण
बड़वानी देश और प्रदेश में बन गया इकलौता जिला
 जिसके सभी न्यायालय भवन है आईएसओ अवार्ड प्राप्त
बड़वानी से हेमंत नागझिरिया की रिपोर्ट : – 
 म.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायमूर्ति  अजय कुमार मित्तल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायमूर्ति  संजय यादव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं प्रशासनिक न्यायाधिपति उच्च न्यायालय इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति  सुरेशचंद शर्मा तथा सदस्य सचिव मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर  गिरिबाला सिंह ने ई – लोकापर्ण के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील राजपुर, अंजड़ व खेतिया में नवनिर्मित मध्यस्था केंद्र भवनों का ई-लोकार्पण शनिवार को जबलपुर से किया। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधिपति ने राजपुर, अंजड़  और खेतिया न्यायालय को प्राप्त आईएसओ 9001 2005 प्रमाण पत्र भी प्रदान करने की कार्यवाही की।
    इस अवसर पर मध्यस्थता केंद्र राजपुर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बड़वानी  राजेश गुप्ता, न्यायाधीशगण  निर्भयकुमार गरवा, अरुण सिंह अलावा, अंजड़ मध्यस्था केंद्र पर विशेष न्यायाधीश  दिनेश चंद्र थपलियाल, भूतपूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश  रामेश्वर कोठे, न्यायाधीश  अमूल मंडलोई व  आभा गवली, खेतिया में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश  कृष्णा परस्ते,  आशुतोष अग्रवाल,  विशाल खाडे तथा संबंधित अभिभाषक संघ के पदाधिकारी भी उपस्थित थे ।
    उल्लेखनीय है कि बड़वानी, प्रदेश का और देश का अब प्रथम जिला बन गया है जिसके सभी न्यायालय अपनी व्यवस्थाओ, आने वाले पक्षों की सुविधा के लिए सहज दृश्य, पक्षकार उन्मुख वातावरण ,अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक सुंदर परिवेश उपलब्ध कराने के लिए आईएसओ प्रमाण पत्र प्राप्त है। 
    इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बड़वानी  राजेश गुप्ता ने बताया कि जिले के दूरस्थ तहसील स्थानों पर निर्मित यह मध्यस्थता केंद्र, पक्षकारों को मध्यस्थता की निःशुल्क सरल, सहज, गोपनीय प्रक्रिया के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण, स्वैच्छिक, स्थाई समाधान करने और समाज में सौहार्द, शांति स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। इससे विधिक सहायता और सेवा की सभी गतिविधियों को भी दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाने में मदद मिलेगी ।    

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