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इंदौर:- ब्लैक फंगस का कहर, 200 से ज्यादा केस हुए, बाजार में इंजेक्शन मौजूद नहीं
इंदौर:- मध्यप्रदेश में भोपाल और इंदौर में ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. इंदौर में ब्लैक फंगस का आंकड़ा 200 पहुंच चुका है रोजाना एम एच वाय हॉस्पिटल में 8 से 10 मरीज भर्ती हैं बताते चलें कि रोजाना 8 से 10 नए मामले सामने आ रहे हैं.
इसके इलाज में जिस इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है वह बाजार में मौजूद नहीं है. एमफोसिटीरिन बी, पोसाकोनाजोल, आइसेबुकोनाजोल बाजार से गायब हो गया है.
बताते चलें कि इस इंजेक्शन के एक वाइल की कीमत 5000 से ₹8000 है. रोजाना एक मरीज को करीब 4 वायल लगाने पड़ते हैं. यानी 1 दिन के खर्चे की अगर बात करें तो 30-35 हजार रुपए सिर्फ इस इंजेक्शन के लग जाते हैं. जिसे ब्लैक फंगस हुआ हो उस मरीज को करीब 7 दिन तक इंजेक्शन लगाना पड़ता है और अगर संक्रमण तब भी नहीं रुका है तो इंजेक्शन आगे भी लगाना पड़ता है.
मेडिकल कॉलेज के HOD ने कहा कि ब्लैक फंगस संक्रमण से होने वाली बीमारी नहीं है.
डॉ जगराम वर्मा ने बताया कि इलाज के साथ-साथ मरीज की सर्जरी करनी भी जरूरी है अगर शुरुआत में ब्लैक फंगस पकड़ा जाए तो 7 दिन तक यह इंजेक्शन तो लगाना ही पड़ता है.
भोपाल में ब्लैक फंगस का कहर :-
कोरोना के बढ़ते कहर के बीच ब्लैक फंगस नई मुसीबत बनता जा रहा हैं। ब्लैक फंगल इंफेक्शन को लेकर सरकार अलर्ट मोड पर हैं। सरकार ने बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए तैयारी शुरू कर दी हैं।
बता दे कि राजधानी भोपाल में अब तक 70 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। भोपाल में अलग-अलग अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 70 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा हैं। हमीदिया अस्पताल में सबसे ज्यादा 23 मरीज भर्ती हैं। हमीदिया में 2 दिन में 30 बेड में से 15 बेड मरीजों से भर चुके हैं।
प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि ब्लैक फंगस इंफेक्शन से निपटने के लिए चार विंग काम कर रही हैं। इनमें ईएनटी, नेत्र रोग विभाग, न्यूरोलॉजी और मेडिसन को मिलाकर एक यूनिट बनाई गई हैं। सर्जरी के लिए नॉन कोविड और कोविड पॉज़िटिव मरीजों के लिए अलग-अलग ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था भी की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले फेज में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल और जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में यूनिट शुरू की जा रही हैं।
बता दे कि बुधवार को ब्लैक फंगस के बढ़ते इंफेक्शन को लेकर हमीदिया अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और डॉक्टर्स, अधिकारियों की आपात बैठक हुई थी। इसमें अमेरिकी डॉक्टर मनोज जैन से बीमारी से निपटने के उपाय करने पर डेढ़ घंटे चर्चा हुई। डॉ मनोज जैन ने इस से निपटने के लिए कई सुझाव इस बैठक में दिए। जिसपर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सुझावों पर अब मध्यप्रदेश में अमल किया जाएगा।
बताया जा रहा है कोरोना से पीड़ित होने के बाद स्टारायेड के ओवरडोज के कारण भी यह संक्रमण अटैक करता हैं। कोरोना का इलाज करा चुके मरीज़ों में खासतौर से जिन्हें ऑक्सीजन का सपोर्ट लेना पड़ा या स्टेरॉयड की ओवरडोज हुई उनमें ये फंगस पनप रही हैं। फंगस आंख, नाक, कान या ब्रेन में भी हो सकती हैं।