
भोपाल : मध्यप्रदेश में आयुर्वेदिक जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर करीब 10 दिन से हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा छात्रों का कहना है कि हम अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार एक नहीं सुन रही है। आयुष विभाग के अधिकारियों ने कोई आश्वासन तक नहीं दिया है। आयुष मंत्री रामकिशोर कांवरे ने तो हमसे बातचीत भी करना जरूरी नहीं समझा। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाएंगी हम प्रदर्शन करते रहेंगे।
ये है इन आयुर्वेदिक जूनियर डॉक्टर्स की मांग
- स्टायपेंड एलोपैथी छात्रों के बराबर करके इसे सीपीआई से लिंक किया जाए
- मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी जबलपुर से आयुष शाखा को अलग कर भोपाल में आयुष विश्वविद्यालय का गठन किया जाए।
- एमपीपीएससी से हर साल आयुर्वेद मेडिकल ऑफीसर की भर्ती की जाए।
- जन संकल्प 2013 के अनुसार आयुष विभाग के अंतर्गत 1000 नवीन आयुष औषधालय जाएं।
- मप्र में आयुष चिकित्सकों को आपातकालीन एलोपेथी पद्धति के उपयोग का अधिकार दिया जाए।
वहीं, इन छात्रों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आयुष विभाग की आयुक्त करलिन खोंगवार देशमुख ने शुक्रवार को आयुर्वेद , होम्योपैथी और यूनानी छात्रों का स्टायपेंड 24 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव वित्त विभाग के पास भेजा है।
इससे पहले लगभग 1 दर्जन से अधिक जूनियर डॉक्टर्स ने ब्लड डोनेट भी किया। ब्लड डोनेशन के पीछे जूनियर डॉक्टर का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं कर रही है। वह उनका खून चूस रही है। इसलिए ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर यह ब्लड सरकार को ही दिया जा रहा है। जूनियर डॉक्टर्स कि स्पष्ट चेतावनी है कि जैसे-जैसे वक्त बीतता जाएगा उनका यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा।