आखिर कब तक होता रहेगा अतिथि विद्वानों के साथ अन्याय??
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आखिर कब तक होता रहेगा अतिथि विद्वानों के साथ अन्याय??
भोपाल मध्य प्रदेश में बीते करीब डेढ़ साल से अतिथि विद्वान सेवा से बाहर है.वह लगातार सेवा में बहाली को लेकर लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं पर अभी तक लगभग 600 फालेन आउट अतिथि विद्वान सेवा से बाहर है.
सरकार उनकी एक नहीं सुन रही है. शिवराज सिंह चौहान के पूर्व की सरकार में किए गए सारे वादे फेल होते नजर आ रहे हैं. कमलनाथ की सरकार थी उस दौरान अतिथि विद्वानों को सेवा से बाहर किया गया था तब शिवराज सिंह चौहान के धरना स्थल पर गए थे और कहा था कि उनकी सरकार आते ही सबसे पहला काम होगा कुछ विद्वानों की सेवा में बहाली पर 1 साल से ज्यादा समय शिवराज सरकार को हो गया लेकिन अभी तक अपनी आर्थिक स्थिति से यह अतिथि विद्वान जूझ रहे है.
अतिथि विद्वानों के नाम पर कमलनाथ की सरकार के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी सरकार के खिलाफ मुखर हुए थे और फिर उन्होंने पार्टी बदल ली थी. साथ सड़कों पर उतरने की बात करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब अतिथि विद्वानों के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है.
अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा कि यही स्थिति बनी रही तो धीरे-धीरे कर सभी फॉलेन आउट अतिथि विद्वान आत्महत्या कर लेंगे.
भाजपा के भी मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी अतिथि विद्वानों के मुद्दे पर मुखर हुए हैं उन्होंने कहा है कि जब सरकार ने इतने साल तक विद्वानों से काम लिया तो देश के बच्चों को पढ़ाने का काम अतिथि विद्वानों ने बखूबी निभाया तो अब सरकार पीछे क्यों हट रही है. उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों के मुद्दे पर वह अपनी आवाज उठाएंगे. सरकार को चाहिए कि अतिथि विद्वानों के हित में जल्द फैसला किया जाए.


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