एक-एक कर आत्महत्या करने को मजबूर फॉलन आउट अतिथि विद्वान,आखिर कब होगा इनके साथ न्याय

एक-एक कर आत्महत्या करने को मजबूर फॉलन आउट अतिथि विद्वान,आखिर कब होगा इनके साथ न्याय

भोपाल/ गरिमा श्रीवास्तव :– मध्यप्रदेश में लगभग डेढ़ साल से फालेन आउट अतिथि विद्वान अपनी सेवा में बहाली को लेकर गुहार लगा रहे हैं पर सरकार इनकी एक भी नहीं सुन रही है.

 लगातार अतिथि विद्वान ज्ञापन के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से खुद मंत्रियों से मिलकर अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत करा रहे हैं लेकिन किसी का भी ध्यान इन पर नहीं है.

 वित्त मंत्री ने यह बात कही थी कि आप सभी की सेवा में बहाली पर विचार हो रहा है. पर यह मंत्री इसी तरह की बातें कहकर अपना पल्ला झाड़ते साफ तौर पर नजर आ रहे हैं.

 फॉलन आउट अतिथि विद्वान अपनी आर्थिक स्थिति से जूझते जूझते आत्महत्या करने को मजबूर हैं. हाल ही में एक और फालेन आउट अतिथि विद्वान ने आर्थिक संकट की वजह से आत्महत्या कर ली.

 

 जिन के मुद्दे पर बनी थी शिवराज सरकार उन्हीं के हित में नहीं हुआ अब तक काम :-

बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले साल बड़ा उलटफेर हुआ था. ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे.

 पूर्व में कमलनाथ की सरकार के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने ही सरकार के खिलाफ मुखर हुए थे और उन्होंने अतिथि विद्वानों के लिए सड़कों पर उतरने की बात कही थी..

  ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए और 20 मार्च को कमलनाथ की सरकार गिर गई. 23 मार्च को एक बार फिर से वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता की कुर्सी संभाली.

 जब सत्ता में शिवराज की सरकार नहीं थी तो वह बार-बार यही बात कहते रहते थे कि उनकी सत्ता में वापसी होते ही सबसे पहला काम होगा अतिथि विद्वानों की सेवा में बहाली और उनका नियमितीकरण.

 पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सरकार बनाए 1 साल से ज्यादा समय हो गया लेकिन अभी तक अधिक विद्वान सेवा से बाहर है. लगभग 600 अतिथि विद्वानों की सेवा में बहाली नहीं हुई है.

हाल ही में अतिथि विद्वानों के मुद्दे पर मुखर हुए यह विधायक :

हाल ही में अतिथि विद्वानों के मुद्दे पर मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हुए. उन्होंने सतना मे कहा कि अतिथि विद्वानों ने इतने लंबे समय तक कम मानदेय में मध्यप्रदेश के छात्रों को पढ़ाया है, तो यह हमारी सरकार का फर्ज बनता है कि उनका उचित मानदेय तय करें और उन्हें वापस सेवा में लें. उन्होंने यह बात भी कहीं की मैं इस मुद्दे को उठाऊंगा.

 अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा कि फॉलन आउट अतिथि विद्वानों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, वह आत्महत्या करने को मजबूर है अगर सरकार उनकी जल्द से जल्द सेवा में बहाली नहीं करती है तो धीरे धीरे कर सभी अतिथि विद्वानों को आत्महत्या करने पड़ेंगे. और इसकी जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ शिवराज सरकार होगी.

तो अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नजर इन फालेन आउट अतिथि विद्वानों पर कब पड़ती है

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