लोकतंत्र निरुत्तर:- "शिव राज" में लोकतंत्र का हनन! सम्मेलन जारी पर विधानसभा सत्र पर रोक, विधायकों के 3 हजार से अधिक सवाल अटके

लोकतंत्र निरुत्तर:- "शिव राज" में लोकतंत्र का हनन! सम्मेलन जारी पर विधानसभा सत्र पर रोक, विधायकों के 3 हजार से अधिक सवाल अटके

लोकतंत्र निरुत्तर:- "शिव राज" में लोकतंत्र का हनन! सम्मेलन जारी पर विधानसभा सत्र पर रोक, विधायकों के 3 हजार से अधिक सवाल अटके


भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्यप्रदेश में सत्ता का इस तरह से उलटफेर हुआ है कि लोकतंत्र निरुत्तर है. शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना महामारी को जिम्मेदार ठहराते हुए विधानसभा सत्र को स्थगित करा दिया.. लेकिन उनके सम्मेलन जारी है. सत्र से पहले राज्य में उपचुनाव कराए गए नेताओं ने बड़े-बड़े सम्मेलन की है जिसमें ना तो कोरोना के नियमों का पालन किया गया, न ही उस दौरान शिवराज ने कोरोना को लेकर इतनी कड़ाई की.. यहां तक कि विधानसभा सत्र स्थगित होने के बाद शिवराज के चौथे मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ जिसमें सिंधिया समर्थक तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की.. गोविंद सिंह राजपूत सुरखी विधानसभा में जब मंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद पहली बार पहुंचे तो उस दौरान भी नियमों का खूब उल्लंघन किया गया.. पर इन सभी चीजों में शिवराज सिंह चौहान को कोरोना का डर नहीं था.. 

 विधायकों के हजारों सवाल अटके:- 

 महामारी को जिम्मेदार बताकर इस बार ना तो सदन में बैठी हुई और ना ही विधायकों को उनके सवालों के जवाब मिले. विधायकों के अभी तक 3000 से ज्यादा सवाल लटके हुए हैं. अगर विधानसभा चाहती तो सवालों के जवाब दे सकती थी पर शिवराज सिंह चौहान बार-बार महामारी का हवाला देते रहे.. मौजूदा 15वीं विधानसभा में कुल 9 बार सत्र बुलाया गया लेकिन शुरू होने से पहले ही यह सत्र निरस्त हो गया..
 कांग्रेस विधायक डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा कि विधायकों के सवाल का जवाब देने समिति बनाने पर सहमति बनी थी लेकिन समिति का गठन ही नहीं है..

 कोरोना और सत्ता के बदलाव का खामियाजा भुगत रहा लोकतंत्र:-

 भाजपा सरकार ने तीन बार सदन की बैठक बुलाई गई दिसंबर का शीतकालीन सत्र निरस्त हो गया इससे पहले मार्च व सितंबर में सिर्फ दो सत्र हुए मार्च में 2 बेड के हुई जो 1 घंटे 26 मिनट तक चली. तो वहीं सितंबर में सिर्फ 9 मिनट तक की चर्चा हो सकी.. 


 विधायक बार-बार यह शिकायत करते हैं कि उन्हें उनके सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं. सरकार को जिन सवालों का जवाब नहीं देना होता है उस पर वह लिख देते हैं की जानकारी एकत्रित की जा रही है पर उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है..

 प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा कि विधायकों को उनके सवालों के जवाब दिए जाएंगे गाइड लाइन बन रही है बजट सत्र आने वाला है इसमें ज्यादा बैठते होंगे... 

 जनता भी अब यह बात महसूस करने लगी है कि शिवराज सिंह चौहान जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस करने से कतरा रहे हैं..