
भोपाल/निशा चौकसे:- मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में लगातार राजनीति में गर्माहट देखने को मिलती है. वहीं पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर बयान बाजी करते हुए नजर आते है. हाल ही में ऐसा ही एक वाक़या सामने आया है जहां भारतीय जनता पार्टी कि मोर्चा उपाध्यक्ष और विधायक कृष्णा गौर कांग्रेस की रणनीतियों को उजागर करने आई थी जिसमें उन्होंने आरक्षण के आंकड़े ही गलत बता दिए. कृष्णा गौर ने जो आंकड़े पेश किए उसमें उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में अभी 14% आरक्षण ओबीसी को मिल रहा है 12% एसटी को और 16% आरक्षण ऐसी को मिल रहा है. 10% आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिल रहा है. फिर उनके मुताबिक आंकड़े मिलाकर 50% हो जाते हैं. जबकि यह आंकड़े कुल मिलाकर 52% होते हैं.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा
कृष्णा गौर कांग्रेस को घेरते हुए बोली की इस पार्टी ने भी पिछड़ा वर्ग को सम्मान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मंडल आयोग की सिफारिशों को नहीं माना इसके अनुसार 22.5% आरक्षण एससी-एसटी को और 27% आरक्षण ओबीसी को दिया जाना था. साथ ही कहा कि राज्य सरकार ओबीसी को 27% आरक्षण देने के लिए स्वतंत्र थी. लेकिन कांग्रेस ओबीसी की आबादी 27% बताती रही. जबकि वास्तविक आबादी 51% है. ओबीसी की 100% आबादी को 100% आरक्षण कैसे दिया जा सकता है? कांग्रेस पार्टी ने झूठ बोलने का काम किया है इस झूठ के कारण ही ओबीसी को 27% आरक्षण नहीं मिला. प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में 27 मंत्री ओबीसी वर्ग के हैं मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार आई तो उमा भारती को मुख्यमंत्री बनाया लगातार तीन मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग के बने लेकिन 2003 के पहले के इतिहास को देखना चाहिए कि कितने मुख्यमंत्री हो ओबीसी वर्ग के बने.
कांग्रेस नहीं चाहती थी ओबीसी को आरक्षण मिले:- कृष्णा गौर
कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कृष्णा गौर ने कहा कि कमलनाथ की सरकार एक्सीडेंटल सरकार बनी थी. उस समय एक बार आरक्षण के नाम पर पिछड़े वर्गों को गुमराह करने का काम किया गया 14% से बढ़ाकर 27% आरक्षण देने की घोषणा हुई इसके बाद कांग्रेस को लगा कि प्रदेश का पिछड़ा वर्ग उनको समर्थन देगा लेकिन इस समाज ने उनका समर्थन नहीं किया. याचिकाएं लगाने के बाद भी कांग्रेस का एडवोकेट कोर्ट में खड़ा तक नहीं हुआ कांग्रेस चाहती ही नहीं थी कि ओबीसी का आरक्षण 27% किया जाए.
विवेक तंखा की याचिका पर दिया जवाब
गौर बोलीं कि पंचायत चुनाव में ओबीसी को आरक्षण नहीं मिलने पर कहा कि कांग्रेस चाहती ही नहीं थी कि ओबीसी को आरक्षण मिले इसलिए कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तंखा ने कोर्ट में याचिका लगाई. कोर्ट में याचिका लगाई थी तो उन्हें बहस करनी चाहिए थी. लेकिन उनके मंसूबे पूरे हो चुके थे. रोटेशन तो सिर्फ एक बहाना था. कांग्रेस बहुत अच्छे से जानती थी कि महाराष्ट्र में अरुण गवली के केस में ऐसा ही केस आया था. जबकि मध्यप्रदेश और अरुण गवली का केस बिल्कुल अलग था. उसी आधार पर यह फैसला सुना दिया जबकि कांग्रेस को यह तथ्य न्यायालय को बताना था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया.
कांग्रेस ने किया पलटवार
कृष्णा गौर के आरक्षण के आंकड़ों को गलत पेश करने पर कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट करके पूछा कि क्या कारण है कि भाजपा नेता लगातार एसटी वर्ग के 20% आरक्षण को कम कर बता रहे हैं यह कोई बड़ी साजिश या षड्यंत्र तो नहीं है. यदि यह साजिश या षड्यंत्र नहीं तो क्या भाजपा नेताओं का ज्ञान इतना कमजोर है कि वह आरक्षण को लेकर पत्रकार वार्ता तो ले रहे हैं लेकिन उन्हें खुद भी यह नहीं पता कि मध्यप्रदेश में किस वर्ग को कितना आरक्षण मिल रहा है. साथ ही कहा कि जिम्मेदार मंत्रियों को भी आरक्षण का ज्ञान नहीं है ऐसे लोग कैसे पद पर हैं. बता दें कि कृष्णा गौर से पहले प्रदेश के मंत्री भूपेंद्र सिंह एसटी वर्ग के आरक्षण को 7.5% बता चुके हैं और अब विधायक कृष्णा गौर एसटी वर्ग के आरक्षण को मात्र 12% बता रही हैं.
मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान है , अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 फ़ीसदी आरक्षण और ओबीसी वर्ग के लिए 14% के आरक्षण को कमलनाथ सरकार ने बढ़ाकर 27% किया था।
ऐसा लग रहा है कि भाजपा आरक्षण को लेकर कोई षड्यंत्र रच रही है। pic.twitter.com/HaevBtelvN— Narendra Saluja (@NarendraSaluja) January 9, 2022
मध्यप्रदेश में इन वर्गों के असल आकड़े
भाजपा नेताओं के आंकड़े तो अनाप-शनाप है लेकिन मध्य प्रदेश के इन वर्गों के आंकड़े कुछ इस तरह हैं- ओबीसी वर्ग के लिए 14% आरक्षण है. जिसे प्रदेश सरकार ने एक स्टैंडिंग आर्डर निकाल कर आगामी सभी सरकारी भर्तियों में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने को कहा है. वहीं एसटी वर्ग के लिए 20% और एससी वर्ग के लिए 16% रिजर्वेशन का प्रावधान है. इसके अलावा 10% आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए है. बता दें कि ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने की याचिका कोर्ट में लगी हुई है. जिस पर विचार किया जा रहा है. भाजपा नेताओं के आरक्षण को लेकर यह गलत आंकड़े कोई पहली बार नहीं हैं ऐसा कई बार देखा जाता है. कृष्णा गौर के इन गलत आंकड़ों को बताने के बाद उन्होंने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है.