
भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – जबलपुर से पाटन विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय विश्नोई मंत्री पद के दावेदार थे। इसे लेकर वे कुछ महीनों से तीखे तेवर अपना रहे थे। हालही में शिवराज सरकार के तीसरे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनकी खुलकर नाराजगी सामने आई। उन्होंने जबलपुर समेत महाकोशल के विधायकों की उपेक्षा का आरोप लगाया हैं। बता दे कि बीती रविवार को सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट को मंत्री बनाया गया हैं।
पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने ट्वीट करते हुए लिखा की – महाकौशल और विंध्य अब फडफड़़ा सकते हैं, उड़ नहीं सकते। दो ट्वीट में लिखा कि ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा क्षेत्र का हर दूसरा भाजपा विधायक मंत्री हैं। सागर, शहडोल संभाग का हर तीसरा भाजपा विधायक मंत्री है। महाकौशल के 13 भाजपा विधायकों में से एक और रीवा संभाग में 18 भाजपा विधायकों में से एक को राज्य मंत्री बनने का सौभाग्य मिला हैं। महाकौशल और विंध्य को अब इससे ही खुश रहना होगा। खुशामद करते रहना होगा। विश्नोई ने यह पीड़ा मंत्रिमंडल विस्तार के दूसरे दिन जाहिर की।
अजय विश्नोई की इस नाराज़गी के बाद जबलपुर की राजनीति में हडक़ंप मच गया हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं ने विश्नोई का समर्थन तो किया है, लेकिन पार्टी गाइड लाइन को देखते हुए खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। इधर, कांग्रेस भी अजय विश्नोई के समर्थन में उतर आई हैं।
कांग्रेस के पूर्व विधायक निलेश अवस्थी ने सीएम शिवराज से अजय विश्नोई को मंत्री बनाने की मांग की हैं। नीलेश अवस्थी ने 2013 में विश्नोई को हराकर विधायक बने थे। जबकि 2018 के चुनाव में विश्नोई ने उन्हें हराया था। अवस्थी ने कहा कि इस संबंध में सीएम को पत्र लिख रहे हैं। भाजपा सरकार में महाकौशल प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा हैं।
मालूम हो कि विश्नोई पिछले एक साल से मुखर होकर सामने आ रहे हैं। वो कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराज़गी जता चुके हैं। लेकिन इस बार उन्होंने खुलकर अपना दर्द बयां किया हैं। जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में बवाल मच गया हैं।