
- एयर इंडिया की हुई घर वापसी
- दीपम ने किया एलान
- टाटा ग्रुप ने ख़रीदा
दिल्ली/अंजली कुशवाह: टाटा ग्रुप को एअर इंडिया की कमान मिल चुकी है. 68 साल बाद एअर इंडिया की घर वापसी होगी. मिली जानकारी के अनुसार टाटा ग्रुप 18,000 करोड़ रुपए में बीडिंग को जीत लिया है. इसका ऐलान फाइनेंस मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) ने किया हैं.
जानकारी के अनुसार दीपम के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडे ने बताया हैं कि जब एयर इंडिया विनिंग बिडर के हाथ में चली जाएगी तब उसकी बैलेंसशीट पर मौजूद 46,262 करोड़ रुपए का कर्ज सरकारी कंपनी AIAHL के पास जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार को इस डील में 2,700 करोड़ रुपए का कैश मिलेगा.
डील में एयर इंडिया की जमीन और इमारतों सहित किसी भी नॉन एसेट को नहीं बेचा जाएगा. कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपए के ये एसेट सरकारी कंपनी AIAHL के हवाले कर दी जाएंगी. कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS की आधी हिस्सेदारी भी मिलेगी.
स्पाइसजेट भी था रेस में
जानकारी के अनुसार एअर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के अजय सिंह ने बोली लगाई थी. हालाँकि हाल ही में ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में कहा था कि एअर इंडिया के लिए पैनल ने टाटा ग्रुप को चुन लिया है. एअर इंडिया के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख 15 सितंबर थी जिसके बाद से ही यह अनुमान था कि टाटा ग्रुप एअर इंडिया को खरीद सकता है.
कर्ज के बोझ से दबी है एयर इंडिया
भारी-भरकम कर्ज से दबी एअर इंडिया को कई साल से बेचने की योजना में सरकार नाकाम रही है. उसने 2018 में 76% हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली मंगाई थी और मैनेजमेंट कंट्रोल अपने पास रखने की बात कही थी. जब इसमें किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई तो सरकार ने मैनेजमेंट कंट्रोल के साथ बेचने का फैसला किया.
टाटा ग्रुप ने शुरू किया था एयर इंडिया
एअर इंडिया को 1932 में टाटा ग्रुप ने ही शुरू किया था. टाटा समूह के जे.आर.डी. टाटा इसके फाउंडर थे. वे खुद पायलट थे. तब इसका नाम टाटा एअर सर्विस रखा गया. 1938 तक कंपनी ने अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर दी थीं. दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया. आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49 पर्सेंट हिस्सेदारी खरीदी.