गुरुओं की प्रेरणा से रक्तदान कर अपने मानव जन्म को सार्थक करती महिला

मध्यप्रदेश/इंदौर : इंदौर निवासी तरनजीत कौर बताती हैं कि वाक्या 2006 का है जब बेटा हरमन होने वाला था माँ बनने का सुखद एहसास लिए जब प्रेग्नेंसी चेकअप हेतु क्लिनीक पहुंची और डॉक्टर द्वारा तुरन्त सेक्शन सर्जरी के लिए बोल दिया गया जिस हेतु रक्त की तुरन्त आवश्यकता थी उन दिनों सोशल मीडिया ज्यादा प्रचलित न होने से रक्तदाता तक जल्दी पहुंचना भी सम्भव न था एवं सभी परिचितों रिश्तेदारों को लगातार फोन करने पड़े तो रक्त की कीमत समझ मे आई तब अपने आप से वादा किया कि जब भी किसी जरूरतमंद का पता चलेगा तो रक्तदान में कभी पीछे नही हटूंगी। 

गुरुओं के बलिदान एवं उनकी बाणी ( मानस की जात सभ एकै पहचानबो ) में सभी मनुष्यों को एक नज़र से देखने के छुपे सन्देश के साथ बैसाखी के दिन से चला आ रहा सिलसिला थैलीसीमिया के बच्चों को 39 बार रक्तदान के साथ निरन्तर जारी है। अपने जन्मदिन,शादी की सालगिरह जैसे मौके को रक्तदान करने का अवसर बनाया है एवं इस हेतु मुझे मेरे पति मनिंदर सिंह एवं परिवार का पूरा सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलता है। 

प्रेरक प्रसंग -ज़िन्दगी का सबसे सुखद पल वह था जब गम्भीर बीमारी केंसर से जूझते पिता को अपने जन्मदिन पर रक्त देकर अपने जीवन का सबसे सुखद पल बना लिया।

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