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शिवराज कैबिनेट विस्तार के साइड इफ़ेक्ट अब आने लगे सामने, BJP विधायक ने खोला मोर्चा, कुछ और मुँह खुलेंगे, इंतजार कीजिए

 

  • “शिव राज” कैबिनेट:- ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा का हर दूसरा विधायक मंत्री, महाकौशल और विंध्य सिर्फ फड़फड़ा सकते हैं.. !! 

 भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव:- कल मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट का एक बार फिर से विस्तार हुआ जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत ने मंत्री पद की शपथ ली.

मध्यप्रदेश में सरकार का विस्तार हो गया है। कैबिनेट में अभी 4 पद और खाली हैं.
 बता दें कि ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा क्षेत्र का हर दूसरा भाजपा विधायक मंत्री है। सागर, शहडोल संभाग का हर तीसरा भाजपा विधायक मंत्री है।

पर महाकौशल के 13 भाजपा विधायकों में से एक को तो वही रीवा संभाग में 18 भाजपा विधायकों में से एक को राज्य मंत्री बनने का सौभाग्य मिला है।
 ऐसा लग रहा है कि महाकौशल और विंध्य अब फड़फड़ा सकते हैं उड़ नहीं सकते। महाकौशल और विंध्य को अब खुश रहना होगा। खुशामद करते रहना होगा। यह कहना है खुद भाजपा विधायक अजय विश्नोई का …

 मध्यप्रदेश में उस वक्त सब कुछ बदल गया जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए.. मंत्री पद के दावेदार भाजपा नेताओं को मंत्री पर नहीं मिल पाया, क्योंकि उनकी जगह सिंधिया समर्थक नेताओं ने ले ली और उनकी ताजपोशी हो गई..

 ग्वालियर चंबल क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ कहलाता है. इनके क्षेत्रों से हर दूसरा विधायक मंत्री है. सागर शहडोल संभाग का हर तीसरा के भाजपा विधायक मंत्री है.. पर महाकौशल और रीवा संभाग के विधायकों को ऐसा लगता है कि अभी खुशामदी करने की ज्यादा जरूरत है क्योंकि महाकौशल की 13 भाजपा विधायक तो रहे लेकिन उनमें से सिर्फ एक को और वही रीवा संभाग में 18 भाजपा विधायकों में से सिर्फ एक को राज्य मंत्री का पद मिल पाया..

 भाजपा विधायक अजय विश्नोई की नाराजगी सामने आई है. उन्होंने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर अपनी नाराजगी जताई है. अभी कुछ और भी नाम सामने आ सकते हैं…
 भाजपा में हो रहे अंतर्कलह अब सामने आ रहे हैं.

 

इससे पहले भी शिवराज मंत्रिमंडल को लेकर अजय विश्नोई बीजेपी की कार्यशैली पर लगातार सवाल खड़े कर चुके हैं. पहले भी अजय बिश्नोई ने शिवराज सरकार में क्षेत्रीय संतुलन बनाए जाने की मांग की थी. 
 उन्होंने इससे पहले भी हुए शिवराज मंत्रिमंडल को लेकर यह बात कही थी कि शिवराज कैबिनेट में महाकौशल से कोई प्रतिनिधि नहीं है.

 मप्र राजनीति में सत्ता पलट के बाद यह सरकार शिवराज के नहीं महाराज के हिसाब से चल रहे हैं. महाराज जिसे चाहे उसे मंत्री पद रह सकते हैं जिसे चाहे उसे निगम मंडल में उच्च पद दिला सकते हैं…

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