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दो दशकों से नियमितीकरण हेतु संघर्षरत महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों को नियमित करें शिवराज :अतिथि विद्वान

 

  • 9 महीने से एक हज़ार फालेन आउट अतिथि विद्वानों के आगे रोजी रोटी का संकट

सूबे के सरकारी कॉलेजों में पिछले दो दशकों से अध्यापनरत अतिथिविद्वान अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए कई वर्षों से अपने नियमितीकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।पूरे वर्ष सत्ता के गलियारों में  महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का मुद्दा छाया रहा। मोर्चा के संयोजक व महासंघ के अध्यक्ष डॉ देवराज सिंह का कहना है कि इसी अतिथि विद्वान नियमितीकरण के मुद्दे पर मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का पतन हुआ व शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी,लेकिन सत्ता के केंद्र पर रहे इस चर्चित मुद्दे पर वर्तमान शिवराज सरकार एक भी कदम अभी तक आगे नही बढ़ी है।संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा है कि शाहजाहानी पार्क भोपाल में अतिथि विद्वानों का आंदोलन कई महीने तक चला जो मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन साबित हुआ और इसी आंदोलन ने सत्ता की जड़ों को हिलाकर रख दिया।इस आंदोलन में सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान सहित सभी वर्तमान कैबिनेट मंत्री तक आए और सत्ता में आते ही अतिथि विद्वानों के अविलंब नियमितीकरण की बात भी कही।किन्तु यह बात भी अब तक कोरा चुनावी वादा ही साबित हुआ है। यहां तक कि अतिथि विद्वानों की दुर्दशा से द्रवित होकर राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की धमकी दे डाली थी किन्तु यह विडंबना ही है कि इतने संघर्षों के बाद भी अतिथि विद्वानों के हाथ अब भी खाली।
*7 महीने से कैबिनेट से पास 450 पदों का अभी तक वित्त विभाग से पृष्ठांकन ना हो पाना समझ से परे*
संघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए शासन प्रशासन से अनुरोध किया है कि आज 9 महीने बाद सरकार बाहर हुए 1000 अतिथि विद्वानों को सेवा में नहीं ले पाई है ताज्जुब की बात है कि पिछले कांग्रेस सरकार में ही कैबिनेट से 450 पदों की मंजूरी मिल चुकी थी लेकिन कैबिनेट से पास होने के बावजूद भी लगभग 7 महीने से वित्त विभाग से पृष्ठांकन तक नहीं हो पाया जो कि समझ से परे है।डॉ पांडेय ने शासन प्रशाशन से विनम्र प्रार्थना करते हुए कहा कि वित्त विभाग से तत्काल पृष्ठांकन करवा कर अभी शेष बचे लगभग एक हज़ार उच्च शिक्षित अतिथि विद्वानों को पुनः व्यवस्था में ले जिससे लगातार अतिथि विद्वानों की होती आत्महत्या रुके और एक सुकून भरी जिंदगी जी पाए।आज हजारों परिवार बेहाल हैं बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
*महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण मुद्दे पर बनी शिवराज सरकार क्यों कर रही है देरी नियमित में ?*
अतिथि विद्वान डॉ जेपीएस चौहान ने बताया कि दुर्भाग्य है कि अपनी पूरी जिंदगी उच्च शिक्षा में लगा देने वाले,पिछले 20 वर्षों से उच्च शिक्षा की सेवा करने वाले सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अतिथि विद्वानों को ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे कभी सोचा नहीं था,अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण मुद्दे पर ही शिवराज सरकार बनी लेकिन दुर्भाग्य की बात है अभी तक नियमितीकरण की तरफ़ एक भी कदम सरकार ने नहीं उठाया है जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।सरकार से विनम्र प्रार्थना है तत्काल बाहर हुए अतिथि विद्वानों को व्यवस्था में लेते हुए नियमित करें।

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